तीन सप्ताह से नहीं बना एमडीएम, पोर्टल पर बच्चों ने कर लिया भोजन

प्राथमिक विद्यालय प्रयागपुर में बीइओ की जांच में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा प्रधान शिक्षिका पर हो सकती है कार्रवाई फोटो-13- प्राथमिक विद्यालय प्रयागपुर में हेडमास्टर व ग्रामीणों से पूछताछ करते बीइओ.

प्राथमिक विद्यालय प्रयागपुर में बीइओ की जांच में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा प्रधान शिक्षिका पर हो सकती है कार्रवाई फोटो-13- प्राथमिक विद्यालय प्रयागपुर में हेडमास्टर व ग्रामीणों से पूछताछ करते बीइओ. सुजीत कुमार, शिवसागर प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय प्रयागपुर में तीन सप्ताह से एमडीएम इसलिए नहीं बन रहा था कि वहां का सबमर्सिबल खराब था. पानी नहीं मिलने के कारण बच्चों का खाना नहीं पकाया जा रहा था. लेकिन, स्कूल के नामांकित बच्चों को इन तीन सप्ताह के दौरान पोर्टल पर मध्याह्न भोजन (एमडीएम) खिलाया जाता रहा. मामला प्रकाश में आया, तो शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की और जांच अधिकारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीइओ) राजेश कुमार ने प्रथम दृष्टया आरोप सही पाया. इससे पहले 18 मई को स्कूल की प्रभारी प्रधान शिक्षिका संगीता को बीइओ ने शो-कॉज जारी किया था. इसका संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर गत 24 मई (शनिवार) को स्कूल पहुंच बीइओ ने छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों से इसकी जानकारी लेते हुए अन्य जांच की थी. बीइओ ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध पाया गया है. जांच रिपोर्ट वरीय पदाधिकारी को दे दी गयी है. वहीं, इस संबंध में प्रधान शिक्षिका ने कहा कि मुझ पर लगाये गये आरोप गलत हैं. मुझे फंसाया जा रहा है. मेरे स्कूल का सबमर्सिबल चोरी हो गया है. इसकी एफआइआर मैंने शिवसागर थाने में दर्ज करायी है. इसकी सूचना विभाग को भी दी थी. पानी के अभाव में मध्याह्न भोजन नहीं बन पाया था. इस दौरान मध्याह्न भोजन बच्चों को खिलाने से संबंधित कोई भी कागजी कार्यवाही मेरे द्वारा नहीं की गयी है. इधर, बीइओ ने बताया कि कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शिक्षा विभाग पटना को प्रभारी प्रधान शिक्षिका के विरुद्ध शिकायत मिली थी. स्कूल में तीन सप्ताह से मध्याह्न भोजन नहीं बनवाये जाने, पेयजल की सुविधा नहीं होने, विद्युत कनेक्शन नहीं होने, शौचालय में हमेशा ताला लगा रहने आदि का आरोप प्रभारी प्रधान शिक्षिका पर लगाया गया है. इसके आलोक में प्रभारी प्रधान शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा गया था. इसके बाद मामले की जांच कर रिपोर्ट उच्च अधिकारी को दे दी गयी है. जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सत्य पाया गया है. विभाग इस पर निर्णय लेगा.

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Author: ANURAG SHARAN

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