गोदाम में हो रही थी खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी

जिले में गरीबों को मुफ्त मिलने वाले अनाज को सिस्टम ने डकारने का काम किया है. इसका खुलासा एक नहीं बल्कि दो-दो स्तर की जांच में हुई है. महाराजगंज अनुमंडल पदाधिकारी और बिहार राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक की अलग-अलग जांच में गोरेयाकोठी एसएफसी टीपीडीएस गोदाम में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं.

प्रतिनिधि,सीवान. जिले में गरीबों को मुफ्त मिलने वाले अनाज को सिस्टम ने डकारने का काम किया है. इसका खुलासा एक नहीं बल्कि दो-दो स्तर की जांच में हुई है. महाराजगंज अनुमंडल पदाधिकारी और बिहार राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक की अलग-अलग जांच में गोरेयाकोठी एसएफसी टीपीडीएस गोदाम में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं. एसडीओ की जांच में जहां 34 बोरा गेहूं और 180 बोरा चावल स्टॉक से अधिक पाया गया. वहीं जिला प्रबंधक की जांच में करीब 85 क्विंटल से ज्यादा चावल अतिरिक्त और कई बोरे कम वजन के मिले. इतना ही नहीं ट्रक और अन्य गाड़ियों के चालकों से अवैध वसूली का आरोप भी गोदाम प्रभारी एजीएम पर लगा. जिसकी पुष्टि भी जिला प्रबंधक की जांच में हुई है. सरकारी गोदाम से उठाव होने वाले खाद्यान्न का कोई पंजी मौके पर नहीं मिला. इससे गोदाम संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है. महाराजगंज अनुमंडल पदाधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार एजीएम मोनिका कुमारी के द्वारा जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं को तौल कर खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था. जांच में इन गड़बड़ियों के बाद सहायक प्रबंधक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है. जिला प्रबंधक आसिफ इकबाल ने सहायक प्रबंधक मोनिका कुमारी के खिलाफ प्रपत्र ‘क’ की कार्रवाई करते हुए निगम मुख्यालय को पत्र लिख दिया है. पीडीएस दुकानदारों को औसत के आधार पर दिया जा रहा था खाद्यान्न गोदाम की जांच में और भी चौंकाने वाली बातें सामने आईं. महाराजगंज एसडीओ ने पाया कि माप-तौल मशीन पूरी तरह खराब और अक्रियाशील अवस्था में पड़ी थी.पीडीएस दुकानदारों को तौल कर खाद्यान्न नहीं दिया जा रहा था बल्कि औसत के आधार पर अनाज प्रेषित किया जाता था. गोदाम की सफाई व्यवस्था और रखरखाव भी पूरी तरह विभागीय मानक से बाहर था. अनाज बिखरा हुआ और गोदाम में काफी गंदगी पाई गई.भौतिक सत्यापन के दौरान 34 बोरा गेहूं और 180 बोरा चावल अधिक पाया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि एजीएम के द्वारा व्यवहारिक दृष्टिकोण नहीं अपनाने के कारण बार-बार विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है.वरीय अधिकारियों के आदेश का पालन भी नहीं किया जाता. विभिन्न स्पष्टीकरणों का जवाब भी समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया. इससे पहले तत्कालीन जिला प्रबंधक ने भी एजीएम मोनिका कुमारी के स्थानांतरण का पत्र मुख्यालय भेजा था. वजन जांच में 47.47 किलोग्राम प्रति बैग निकला इसी बीच अगस्त में जिला प्रबंधक की टीम ने गोदाम की जांच की. उस समय भारतीय खाद्य निगम के डिपो से आई दो गाड़ियों से चावल उतारा जा रहा था. गाड़ियों पर लदा चावल प्रति बैग औसतन 50.43 किलोग्राम पाया गया, जबकि गोदाम में भंडारित करीब 250 बैग का वजन जांच में घटकर सिर्फ 47.47 किलोग्राम प्रति बैग निकला. यानी सीधे तौर पर वजन में कटौती की गई थी.गोदाम पर भंडार पंजी, आगत पंजी और निर्गत पंजी भी नहीं मिला. पूछताछ में एजीएम ने कहा कि पंजी लिखने के लिए किसी को दिया गया है.जांच में 171 बोरा यानी 85 क्विंटल अतिरिक्त चावल पाया गया. साथ ही कम वजन के बोरे भी पकड़े गए.जिला प्रबंधक की रिपोर्ट में साफ लिखा गया कि सहायक प्रबंधक मोनिका कुमारी ने जानबूझकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की मंशा को धूमिल करने वाली गतिविधियां की हैं. पीडीएस दुकानदारों को कम वजन के बोरे देकर सीधा नुकसान पहुंचाया गया. साथ ही ट्रांसपोर्टर के गाड़ियों पर शॉर्टेज दिखाकर गोदाम से अतिरिक्त अनाज भंडारित किया गया और कालाबाजारी के लिए खुले बाजार में भेजा गया.इतनी गड़बड़ियों के बाद अब विभाग ने कार्रवाई का डंडा चलाया है. सहायक प्रबंधक मोनिका कुमारी के खिलाफ प्रपत्र ‘क’ की कार्रवाई शुरू की गई है और आगे भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तय है.

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By DEEPAK MISHRA

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