नगर परिषद में नहीं है कचरा निस्तारण प्लांट, सड़क किनारे लगा रहता कचरे का ढ़ेर

लोगों ने कहा कि सड़क किनारे कचरा डंपिंग करना निगम प्रशासन जल्द से जल्द बंद करे.

सड़क किनारे कचरा डंप करने से शहरवासी कर चुके हैं विरोधखगड़िया. नगर परिषद क्षेत्र का कचरा डंपिंग यार्ड नहीं है. नगर परिषद पिछले एक दशक से कचरा निस्तारण प्लांट स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है, लेकिन अभी तक सफलता हाथ नहीं लगी है.

जिसके कारण नगर परिषद के सफाई कर्मी सड़क किनारे आदि जगहों पर कचरा डंप कर रहे हैं. शहर के परमानंदपुर ढ़ाला एनएच 31, सब्जी आढ़त, हाजीपुर मुहल्ला रेलवे ढ़ाला सहित बाइपास के कई जगहों पर सड़क किनारे कचरा डंप किया जाता है. शहरवासी राकेश गुप्ता, पंकज जायसवाल, विश्वजीत कुमार, सुदर्शन यादव आदि लोगों ने कहा कि सड़क किनारे कचरा डंपिंग करना निगम प्रशासन जल्द से जल्द बंद करे. इससे उठ रही दुर्गंध से राहगीर और शहरवासियों को बहुत परेशानी हो रही है. बाइपास सड़क किनारे में कचरा डंप से कभी कभी दुर्गंध इतनी बढ़ जाती है कि लोगों का घर में रहना मुश्किल हो जाता है. बताया कि लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है. बारिश के समय पर कचरा से उठने वाले दुर्गंध घर में रहना मुश्किल कर देता है. बताया कि हाजीपुर मुहल्ला रेलवे ढ़ाला के समीप कचरा डंप किया जाता है. कचार के दुर्गंध से मुहल्ला वासियों को काफी परेशानी होती है. लोगों को इसके बगल से गुजरने में काफी परेशानी होती है. कचरा डंपिंग स्थल पर दिन-रात जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है. गाय सहित अन्य जानवर प्लास्टिक युक्त कचरा खाकर बीमार हो रहे हैं. सड़क किनारे कचरा डंप होने से कई जानवर बीच सड़क पर बैठे रहते हैं. बताया जाता है कि नगर परिषद की स्थायी समिति की बैठक में कई बार कचरा निस्तारण प्लांट लगाने की मुद्दा उठाया गया. लेकिन, बैठक में ही चर्चा होकर रह जाता है. जमीनी स्तर पर आज तक कोई पहल नहीं किया गया.

हजारों क्विंटल कचरा का प्रतिदिन होता है उठाव

बताया जाता है कि नगर परिषद क्षेत्र के विभिन्न वार्डों से सफाई कर्मियों द्वारा सूखा व गिला कचरा का उठाव किया जाता है. कचरा प्रतिदिन हजारों क्विंटल हो जाता है. कचरा रखने के लिए निस्तारण प्लांट नहीं रहने के कारण सफाई कर्मचारी सड़क किनारे फेंक कर चला जाता है. बाइपास रोड में कई जगहों पर कचरा डंप किया गया है. बाइपास सड़क किनारे मुहल्लावासी को कचरा से उठने वाली दुर्गंध से काफी परेशानी होती है. मुहल्लावासी शुद्ध हवा नहीं ले पाते हैं. अगर, मुहल्लावासी बाइपस में सुबह मॉर्निंग वार्क पर निकलते हैं तो नाक पर रूमाल रखकर जाना होता है.

खुले में फेंके गए कचरा व प्लास्टिक को खा रहे हैं मवेशी

नगर परिषद क्षेत्र में कचरा में मिश्रित प्लास्टिक मवेशी खाकर बीमार हो रही है. नगर परिषद क्षेत्र के घरों से कचरा उठा तो रही है, लेकिन कोई सुरक्षित जगह नहीं होने की वजह से कचरा को खुले में फेंक देती है. कचरों में सबसे ज्यादा हानिकारक प्लास्टिक बैग होता है. जबकि सरकार प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लगाया है. सड़क किनारे डंप किए कचरा पर दर्जनों मवेशी खुराक ढूंढती नजर आती है. ऐसे कचरों की खाने से दुधारू पशुओं में ज्यादा प्रभाव नजर आता है. बताया जाता है कि कचरे की खाने के साथ गाय प्लास्टिक भी खा रहे जा रहे हैं. जिसके कारण पालतु जानवर बीमार हो रहे हैं.

कहते हैं नगर सभापति

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कैप्सन-अर्चना कुमारी, नगर सभापति.

नगर सभापति अर्चना कुमारी ने बताया कि शहर में कचरा निस्तारण प्लांट स्थापित करने के लिए बीते दो वर्षोें से प्रयास किया जा रहा है. जिला प्रशासन व नगर विकास विभाग को भी पत्र लिखा गया है. जल्द ही जगह चिन्हित कर प्लांट स्थापित किया जायेगा. नगर सभापति ने बताया कि निजी स्तर पर भी तीन चार एकड़ जमीन किराये पर उपलब्ध हो जाता है तो छह माह के अंदर कचरा निस्तारण प्लांट स्थापित कर दिया जायेगा.

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