समृद्धि यात्रा : कानून का राज है...विकास में लगे हुए है : नीतीश कुमार

सीतामढ़ी. समृद्धि यात्रा ने तहत सीएम नीतीश कुमार ने बेलसंड प्रखंड के हित नारायण इंटर स्तरीय हाईस्कूल, चंदौली में सोमवार को 67 योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया. इस दौरान

सीतामढ़ी.

समृद्धि यात्रा ने तहत सीएम नीतीश कुमार ने बेलसंड प्रखंड के हित नारायण इंटर स्तरीय हाईस्कूल, चंदौली में सोमवार को 67 योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया. इस दौरान जीविका दीदियों से संवाद कार्यक्रम भी किया. मौके पर सीएम कुमार ने कहा, 24 नवंबर 2005 में एनडीए की पहलू बार सरकार बनी थी, तब से सूबे में कानून का राज है और विकास कार्य में लगे हुए हैं.

— वर्ष 2005 से पहले क्या हाल था?

सीएम ने कहा कि 2005 से पहले सूबे का क्या हाल था? लोग शाम के बाद घर से बाहर नहीं निकलते थे. पूर्व सीएम लालू प्रसाद का नाम लिए बगैर उनके प्रति कटाक्ष कर सीएम ने कहा कि पत्नी को बना (सीएम) लिया था. तब क्या हुआ था? हिंदू-मुस्लिम होता था, समाज में विवाद होता था, स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती थी, सड़कें नहीं थी, बिजली का हाल बेहाल था, इलाज की सुचारू व्यवस्था नहीं थी. अब डर व भय नहीं है. हर ओर भाईचारा है.

— कब्रिस्तान व मंदिरों की घेराबंदी

कहा कि पहले शव के दाह संस्कार व दफनाने के लिए जमीन को लेकर विवाद होता था. उन्होंने 2006 से कब्रिस्तान की घेराबंदी शुरू की, जो पूरी हो चुकी है. अब विवाद नहीं होता है. 2016 के बाद मंदिरों की भी घेराबंदी कर उसे ठीक किया गया है. नए स्कूल खुले और उसमें शिक्षकों का नियोजन किया गया. वर्ष 2023 में बीपीएससी से 2.58 लाख शिक्षक बहाल किए गए है. नियोजित शिक्षकों में 2.66 लाख शिक्षक बीपीएससी वाली परीक्षा पास किए है. शेष 73 हजार के लिए परीक्षा होनी है. उन्होंने कहा कि सड़कें व पुल बन जाने से अब किसी भी क्षेत्र से पांच घंटे में पटना पहुंचना संभव हो गया है. कृषि रोड मैप बनकर जिन योजनाएं जो धरातल पर लागू किया गया और किये जाने के संबंध में सीएम ने विस्तार से जानकारी दी.

— जिले की बड़ी उपलब्धियों को बताया

सीएम कुमार बार-बार 2005 के पहले के बिहार के हालात की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट करा रहे थे. जिले की कुछ उपलब्धियों से भी अवगत कराया और कहा कि सीतामढ़ी में इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित है. महिला आइटीआइ चल रहा है. मेडिकल कॉलेज बन रहा है. जीएनएम कॉलेज, रोड व पुल बनाए गए है. 2006 में ही कटौझा में पुल बनाया गया था. उससे पूर्व बाढ़ के दौरान हर वर्ष क्षेत्र चार माह तक कटा रहता था. डुब्बा, चंदौली व ढेंग पुल का भी जिक्र किया.

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