सामाजिक न्याय संवाद में गरजे कन्हैया, युवाओं से काम का हिसाब मांगने का किया आह्वान

- चिलचिलाती धूप में कन्हैया को सुनने को बेताब दिखे लोग सुपौल. जिला मुख्यालय स्थित एक रिजॉर्ट में शनिवार को आयोजित सामाजिक न्याय संवाद कार्यक्रम में कांग्रेस नेता और

– चिलचिलाती धूप में कन्हैया को सुनने को बेताब दिखे लोग सुपौल. जिला मुख्यालय स्थित एक रिजॉर्ट में शनिवार को आयोजित सामाजिक न्याय संवाद कार्यक्रम में कांग्रेस नेता और पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष डॉ कन्हैया कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की. इस मौके पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया. कार्यक्रम का आयोजन पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मिन्नत रहमानी द्वारा किया गया था, जिसकी अध्यक्षता जिला कार्यकारी अध्यक्ष राजनारायण गुप्ता और शिक्षक प्रकोष्ठ अध्यक्ष डॉ सुरेंद्र प्रसाद यादव ने की. जबकि मंच संचालन कांग्रेस नेता शत्रुघ्न चौधरी ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से की गई. इसके पश्चात मिन्नत रहमानी और उनके समर्थकों ने डॉ कन्हैया कुमार का माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया. मुख्य वक्ता डॉ कन्हैया कुमार ने अपने बेबाक अंदाज में केंद्र और बिहार सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा यह जो डबल इंजन की सरकार है, वह केवल टीवी पर दिखती है, ज़मीन पर नहीं. जनता को लॉलीपॉप दिखाकर वोट ले लिया जाता है, लेकिन चुनाव के बाद कोई सुध नहीं लेता. उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है. युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा अब समय आ गया है कि युवा नेताओं के भाषण नहीं, काम का हिसाब मांगें. कार्यक्रम के अंत में आयोजक मिन्नत रहमानी ने कहा यह सिर्फ एक भाषण नहीं था, बल्कि जनचेतना का आरंभ था. हमारा उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और न्याय की पुनर्स्थापना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कन्हैया कुमार जैसे विचारशील नेताओं के मार्गदर्शन में यह लड़ाई आगे और मजबूती से लड़ी जाएगी. मौके पर डॉ रंजीत मिश्रा, लक्ष्मी सरदार, जितेंद्र कुमार झा, ज्योति खन्ना, शाकिब, अनुपम कुमार, प्रमोद यादव, सोनू आज़ाद, लक्ष्मण झा, पीताम्बर पाठक, संजय भारती, कौशल यादव आदि मौजूद थे. कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ यह कार्यक्रम एक साधारण राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की आवाज़, युवाओं की बेचैनी का मंच, और राजनीतिक चेतना का संगम था. डॉ कन्हैया कुमार का यह दौरा सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि देश के संविधान, लोकतंत्र और युवाओं के भविष्य को बचाने के संघर्ष का हिस्सा है. कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ और गूंजते नारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बदलाव की आहट अब तेज होती जा रही है.

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