रेयाज का बयान भ्रामक व तथ्यहीन : एमजेड खान

रेयाज का बयान भ्रामक व तथ्यहीन : एमजेड खान

अंजुमन तरक्की उर्दू (हिंद) झारखंड के केंद्रीय प्रतिनिधि एमजेड खान ने अंजुमन तरक्की उर्दू गढ़वा के चुनाव के विरोध में रेयाज अहमद के बयान को पूरी तरह भ्रामक व तथ्यहीन बताया है. एक विज्ञप्ति के जरिये केंद्रीय प्रतिनिधि ने कहा कि 14 दिसंबर 2023 को अंजुमन के मरकजी नुमाइंदा के हस्ताक्षर से जारी पत्र में रेयाज अहमद खान को संयोजक की हैसियत से मेंबर बनाकर तीन माह के अंदर लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव कराने का निर्देशि दिया गया था. लेकिन न तो उन्होंने समय पर चुनाव कराया और न ही चुनाव की अधिसूचना जारी की. इस बीच रेयाज अहमद द्वारा आठ मार्च 2024 को चुनाव की तारीख तय करने की एक प्रतिनिधि द्वारा अचानक उन्हें सूचना दी गयी. इसपर उन्होंने निजी कारणों से चुनाव की तारीख बढ़ाने को कहा था. उन्होंने 10 मार्च को अथवा ईद के बाद चुनाव कराने की बात कही थी. लेकिन वे नहीं माने और उन्होंने 15 -20 लोगों के बीच बिना चुनावी प्रक्रिया पूरा किए चुनाव संपन्न करा लिये. उक्त चुनाव के दूसरे दिन जो सदस्य इस तथाकथित चुनाव में शामिल हुए थे, उन्होंने उनसे चुनाव के संबंध में आपत्ति जतायी कि बिना संयोजक की लिखित रिपोर्ट एवं बिना आय-व्यय के 150 सदस्यों की कमेटी में से मात्र 15-20 सदस्यों की उपस्थिति में चुनाव करा लिया गया. जो अलोकतांत्रिक तथा अंजुमन तरक्की उर्दू के बायलॉज के खिलाफ था. अंजुमन के तीन-चार सदस्यों ने उनसे फोन से उक्त चुनाव को मान्यता नहीं दिये जाने का अनुरोध किया था. केंद्रीय प्रतिनिधि ने कहा कि उन्होंने अपने स्तर से जब इसकी जांच की तो इसे सही पाया. परिणामस्वरूप उन्होंने उक्त कमेटी को मान्यता नहीं दी. इसके बाद उन्होंने गढ़वा के मानिंद लोगों से वार्ता कर 28 जुलाई की तिथि निर्धारित की और चुनाव संपन्न कराया.

सूचना नहीं रहने की बात गलत : उन्होंने कहा कि उन्होंने रेयाज अहमद को व्हाट्सएप पर भेजकर 10 दिन पूर्व चुनाव की अधिसूचना जारी करने को कहा था. लेकिन काफी इंतजार के बाद जब श्री अहमद ने नोटिस जारी नहीं किया, तो 26 जुलाई को उन्होंने अर्जेंट नोटिस जारी कर उनके निजी व्हाट्सएप और गढ़वा अंजुमन के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर कर दिया था. इसलिए रेयाज अहमद का यह आरोप कि चुनाव की सूचना नहीं थी, पूरी तरह से गलत है.

यह चुनाव लोकतांत्रिक व नियम संगत : एमजेड खान ने कहा कि रेयाज अहमद को 28 जुलाई के चुनाव में पहुंचने का बहुत इंतजार किया गया. लेकिन एक तो उन्होंने चुनाव का बहिष्कार किया, वहीं सदस्यों को चुनाव में आने से रोकने का भी प्रयास किया. केंद्रीय प्रतिनिधि ने कहा कि इसके बाद तबलीगुल इस्लाम मदरसा में 56 सदस्यों की उपस्थिति में चुनाव संपन्न कराया गया. जो पूरी तरह से लोकतांत्रिक व नियम संगत है.

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