स्थानीय चीजों का उपभोग कर हम रह सकते हैं स्वस्थः डॉ अनंत सिंह

सर्व नारायण सिंह राम कुमार सिंह महाविद्यालय में शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत क्विज एवं डिबेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया.

आरकेएस कॉलेज में हुआ वोकल फॉर लोकल के तहत क्विज व डिबेट प्रतियोगिता

सहरसा. सर्व नारायण सिंह राम कुमार सिंह महाविद्यालय में शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत क्विज एवं डिबेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. डिबेट का विषय था वोकल फॉर लोकल. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ अनंत कुमार सिंह ने की, जबकि मंच संचालन डॉ आर्य सिंधु ने किया. इस मौके पर डॉ अनंत कुमार सिंह ने कहा कि आज जो इतनी बीमारियां है, वह स्वदेशी चीजों को नहीं अपनाने के कारण है. दूसरे देशों के स्कूलों में बच्चों का टिफिन चेक किया जाता है कि वह सही अनाज खा रहे है या नहीं. हमें अपने स्थानीय चीजों का उपभोग करना होगा तभी हम स्वस्थ रह सकते हैं. उन्होंने नवगछिया एवं हाजीपुर में केले की खेती का जिक्र करते कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में समृद्धि आयेगी. एनएसएस पदाधिकारी डॉ कपिल देव कुमार पासवान ने स्वदेशी आंदोलन की भी चर्चा की, जो बंगाल विभाजन के विरोध में चलायी गयी थी. उन्होंने कहा कि आज के बच्चे पुराने संस्कारों से कटते जा रहे हैं. अब तो एनएसएस के माध्यम से भी बच्चों को आत्म निर्भर बनने के बारे में बताया जाता है.

पटसन, अल्हूआ, सुथनी सहित अन्य स्थानीय उत्पादों के बारे में दी गयी जानकारी

डॉ अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि स्थानीय उत्पादन का सबसे बड़ा उदाहरण है मखाना. आज यह व्हाइट हाउस तक पहुंच चुका है. इसका बाजार बहुत बड़ा हो गया है. उन्होंने मड़ुआ एवं स्थानीय चावल की महत्ता के बारे में बताया. सेमल की रुई की विशेषता के बारे में बताया. उन्होंने सामा चकेवा जैसे स्थानीय पर्व को बचाकर रखने की जरूरत पर बल दिया. मधुबनी पेंटिंग के बढ़ते बाजार के बारे में बताया. साथ ही पटसन, अल्हूआ, सुथनी सहित अन्य स्थानीय उत्पादों के बारे में बताया कि इसे अपनाकर कैसे आर्थिक दृष्टिकोण से समृद्ध हुआ जा सकता है. डॉ संजीव शंकर सिंह ने आत्मनिर्भर भारत की जरूरत के बारे में बताया. डॉ नृपेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि अपने स्थानीय उत्पादन को विश्व के बाजार में बेचने के लायक बनायें. इसके लिए न्यू एजुकेशन पॉलिसी में वोकेशनल कोर्स को शामिल किया गया है. उन्होंने ह्युमन रिसोर्स को स्किल बनाने पर बल दिया. डॉ प्रदीप कुमार ने मड़ुआ एवं लीची का जिक्र किया. डॉ गौतम कुमार सिंह ने कहा कि जौ, बाजरा एवं मक्के का यहां बड़े उद्योग लग सकते हैं. मक्के से बहुत सारे प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. कुरकुरा मक्का से ही बनता है, लेकिन इसकी फैक्ट्री कोसी के इलाके में नहीं है. उन्होंने कहा कि सराही में गुड़ बनता है. इलायची वगैरह देकर के इसे स्पेशल बनाया जाता है. मखाना की तरह इसकी भी ब्रांडिंग हो, तो इसे विश्व के बाजार में बेचा जा सकता है. उन्होंने स्थानीय मछली का भी जिक्र करते कहा कि सिंगी, मुंगरी, टेंगरा, पोठी जैसी देसी मछलियां ही स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं. उन्होंने कहा कि भागलपुर का सिल्क उद्योग बेंगलुरु के सिल्क उद्योग से बेहतर हो सकता है, लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण यहां का उद्योग मृतप्राय बना हुआ है.

स्थानीय स्तर पर कुर्थी के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर

डॉ रामनरेश पासवान ने स्थानीय स्तर पर कुर्थी के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कुर्थी का पानी पीने से पथरी गल जाता है. लेकिन दुर्भाग्य से आज लोग इसकी खेती नहीं कर रहे हैं. डॉ डब्लू कुमार ने कहा कि दीवाली आने वाली है, आप लोग मिट्टी का दीया जलायें. प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ नृपेंद्र सिन्हा, डॉ सुधांशु शेखर, डॉ प्रमोद कुमार सिंह, डॉ आलोक आनंद, डॉ डब्लू कुमार एवं डॉ पंकज कुमार थे. प्रतियोगिता में विक्रम कुमार को प्रथम, आनंद कुमार को द्वितीय, देव रुद्र कुमार को तृतीय एवं मधु कुमारी को चतुर्थ पुरस्कार प्राप्त हुआ. कार्यक्रम में डॉ सुधीर कुमार सिन्हा, डॉ अवधेश कुमार मिश्रा, डॉ अनिरुद्ध कुमर, डॉ प्रमोद कुमार सिंह, डॉ अशोक पांडेय, डॉ संजय कुमार सिंह, डॉ प्रेमलता, डॉ धर्मव्रत चौधरी, डॉ सुभाष कुमार, डॉ लीना कुमारी, डॉ विभूति भूषण, हिमांशु राज, मुस्कान परवीन सहित अन्य शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी मौजूद थे.

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