बंद पड़े पीएचसी में एक सप्ताह में शुरू होगी ओपीडी सेवा

छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में जनरेटर और इंवर्टर नहीं होने से बिजली कटते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है

– एएनएम हॉस्टल की समस्याओं पर सीएस सख्त, सुधार के दिए निर्देश

निर्मली.

तीन वर्षों से बंद पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को जल्द ही फिर से चालू किया जाएगा. शुक्रवार को सिविल सर्जन डॉ बाबू साहब झा ने पीएचसी एवं एएनएम ट्रेनिंग स्कूल सह हॉस्टल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं और छात्रावास की व्यवस्थाओं का जायजा लिया. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर आवश्यक तैयारियां पूरी कर पुराने पीएचसी भवन में ओपीडी सेवा शुरू की जाए.

निरीक्षण के दौरान उनके साथ अनुमंडलीय अस्पताल निर्मली के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ शैलेन्द्र कुमार, प्रभारी अस्पताल प्रबंधक सह बीएचएम मुकेश कुमार सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे. सिविल सर्जन ने बताया कि अनुमंडलीय अस्पताल शुरू होने के बाद पीएचसी की सेवाएं अस्थायी रूप से एसडीएच में स्थानांतरित कर दी गयी थीं, लेकिन इसका औपचारिक विलय नहीं हुआ था. इसी कारण अब पीएचसी को अलग इकाई के रूप में पुनः संचालित किया जाएगा और उसका अलग प्रभारी भी होगा. उन्होंने कहा कि पुराने पीएचसी भवन में ओपीडी सेवा बहाल होगी, जबकि इमरजेंसी, लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी सेवाएं पूर्व की तरह अनुमंडलीय अस्पताल में ही संचालित रहेंगी.

छात्राओं ने बतायी बिजली, सुरक्षा व भोजन की समस्या

पीएचसी निरीक्षण के बाद सिविल सर्जन एएनएम ट्रेनिंग स्कूल एवं हॉस्टल पहुंचे. छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में जनरेटर और इंवर्टर नहीं होने से बिजली कटते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है. गर्मी के दिनों में इससे काफी परेशानी होती है. परिसर में सांप निकलने की घटनाओं को लेकर भी छात्राओं ने चिंता जतायी. वहीं मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाये गये. छात्राओं की शिकायत पर सिविल सर्जन ने स्वयं रसोईघर का निरीक्षण किया और भोजन व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए तत्काल सुधार का निर्देश दिया. उन्होंने हॉस्टल में इंवर्टर लगाने, बाथरूमों में दरवाजे लगवाने, साफ-सफाई सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का आदेश दिया. सिविल सर्जन ने कहा कि छात्राओं की मांगें पूरी तरह जायज हैं. छात्रावास में कई बुनियादी सुविधाओं की कमी पायी गयी है, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा ताकि छात्राओं को सुरक्षित और बेहतर माहौल मिल सके.

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