Rourkela News: एनआइटी राउरकेला ने स्वदेशी फोर्स प्लेट विकसित किया, पैर की एड़ी में दर्द और असामान्य चलने का निदान बनायेगा संभव

Rourkela News: एनआइटी के शोधार्थियों ने कम लागत वाला स्वदेशी फोर्स प्लेट विकसित किया है. जिससे जीआरएफ मापना संभव हुआ है.

Rourkela News: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी), राउरकेला के प्रो ए थिरुग्नानम (प्रोफेसर, जैव प्रौद्योगिकी और मेडिकल इंजीनियरिंग विभाग) के नेतृत्व में एक शोध दल ने एक किफायती और स्वदेशी फोर्स प्लेट विकसित की है, जिससे बहु-अक्षीय ग्राउंड रिएक्शन फोर्स (जीआरएफ) मापना संभव हुआ है. यह नवीन उपकरण असामान्य चलने के पैटर्न का सही निदान कर सकता है और भारत के खेल अकादमियों, अस्पतालों, पुनर्वास केंद्रों व शैक्षणिक संस्थानों के लिए उपलब्ध होगा.

शोध दल ने हील पैड की कठोरता और व्यवहार का किया अध्ययन

शोध दल ने इस फोर्स प्लेट के माध्यम से पैर के हील पैड की कठोरता और व्यवहार का अध्ययन किया, जो एड़ी दर्द से जुड़ी समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण है. हील पैड पैर के लिए प्राकृतिक कश्ती का काम करता है और इसके ढलान या कठोर हो जाने से चलने में असुविधा होती है, जो उम्र, मोटापा, चोट या गलत जूतों के कारण उत्पन्न हो सकता है. परंपरागत मेडिकल इमेजिंग और भार-आधारित परीक्षण वास्तविक चलने में हील पैड की गतिविधि का आकलन नहीं कर पाते. यह कमी दूर करते हुए एनआइटी के शोधकर्ताओं ने 3डी मोशन कैप्चर और स्वदेशी फोर्स प्लेट की मदद से हील पैड की कठोरता मापी. इस अध्ययन में सामान्य वजन, अधिक वजन और मोटापे वाले 15 स्वयंसेवकों के डेटा का विश्लेषण किया गया. उन्होंने पाया कि मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों के हील पैड ज्यादा कठोर और कम लचीले थे, जिससे झटकों को अवशोषित करने की क्षमता घट जाती है. इस कारण उनमें एड़ी दर्द और पैरों की अन्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है.

इनसोल डिजाइन के लिए तकनीक का हो सकता है उपयोग

प्रो थिरुग्नानम ने बताया कि न्यूरोमस्कुलर विकार जैसे मायोपैथीज, पार्किंसंस आदि भी चलने के पैटर्न और जीआरएफ को प्रभावित करते हैं. फोर्स प्लेट इस संदर्भ में असामान्यताओं के निदान में उपयोगी होगी. इसके अलावा इस तकनीक का उपयोग ऑर्थोटिक्स, प्रोस्थेटिक्स और जूता उद्योग में भी इनसोल डिजाइन के लिए किया जा सकता है. इस स्वदेशी उपकरण की खासियत इसकी लागत में भारी कमी है. जबकि विदेशी फोर्स प्लेट 30-50 लाख रुपये की होती है, यह प्लेट मात्र 8-10 लाख रुपये में उपलब्ध होगी, जो लगभग 70-85% सस्ती है. इससे भारत में बायोमैकेनिक्स संबंधी उच्च तकनीक व्यापक स्तर पर सुलभ होगी. इस पर एक शोध लेख जर्नल ऑफ मेकैनिक्स इन मेडिसिन एंड बायोलॉजी में प्रकाशित किया गया है

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की बीडीटीडी योजना से प्रोजेक्ट को प्राप्त हुई वित्तीय सहायता

यह उत्पाद शोधविद् मिस थारनी कुमारन और मिस मोनिशा गौरी श्रीनिवासन द्वारा प्रोफेसर ए थिरुग्नानम के मार्गदर्शन में विकसित इस प्रोजेक्ट को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की बायोमेडिकल डिवाइस और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट (बीडीटीडी) योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है. उनके औद्योगिक सहयोगी, एन के इंस्ट्रूमेंट्स, कोलकाता, विशेष रूप से कीर्ति नायक और उनकी टीम ने निर्माण में योगदान दिया. इस नवाचार को स्टार्टअप किनईउत्कल प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से व्यावसायिक रूप दिया जा रहा है, जिसे एफटीबीआइ (एफटीबाआइ), एनआइटी राउरकेला में इन्क्यूबेट किया गया है. इस स्टार्टअप को अन्य उत्पादों के विकास के लिए राउरकेला स्टील प्लांट एसएआइल सीएसआर (सेल, सीएसआर) ग्रांट, केरल स्टार्टअप मिशन (केएसयूएम) और मेइटी टाइड (MeitY Tide) 2.0 (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) से भी समर्थन प्राप्त है. यह स्वदेशी फोर्स प्लेट भारतीय खेल एवं चिकित्सा क्षेत्र में निदान और उपचार की नयी दिशा खोलती है, जिससे पैरों से संबंधित अनेक रोगों का सही व समयोचित प्रबंधन संभव होगा.

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By BIPIN KUMAR YADAV

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