मधुबनी. जिले में लगाया गया ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट का 8वां मॉक ड्रिल कागजों में ही सिमट कर रह गया. राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक सुहर्ष भगत ने सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार को 24 सितंबर को जिले में लगाए गये पीएसए आक्सीजन प्लांट का 8 वां माॅकड्रिल के लिए दिशा निर्देश दिया था. विडंबना यह रहा कि सदर अस्पताल सहित 5 स्वास्थ्य संस्थानों में लगाया गया सभी प्लांट के क्रियाशील नहीं होने के कारण बुधवार को मॉकड्रील नहीं हुआ. परिवार कल्याण स्वास्थ्य मंत्रालय के उपसचिव ने सदर अस्पताल सहित जिले में पांच स्वास्थ्य संस्थानों में लगाये गये ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट को दुरुस्त रखने के लिए मॉकड्रील से संबंधित सभी आवश्यक तैयारी करने का निर्देश राज्य स्वास्थ्य समिति को दिया था. उप सचिव के निर्देश के आलोक में राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा इस आशय का पत्र सिविल सर्जन को दिया गया था. ताकि किसी भी आकस्मिकता की स्थिति में बिना किसी व्यवधान के स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति बेड पर हो सके. कोरोना महामारी के समय सदर अस्पताल सहित जिले के 5 स्वास्थ्य संस्थानों में वर्ष 2021 में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाया गया था. ताकि कोरोना से प्रभावित मरीजों के अलावे अस्पताल में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति निर्बाध रुप से हो सके. विडंबना यह है कि विभाग द्वारा सदर अस्पताल को छोड़कर अन्य किसी भी स्वास्थ्य संस्थानों में टेक्नीशियन पदस्थापित नहीं किये जाने के कारण ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट का संचालन 24 घंटे नहीं हो रहा है. जिसके करण ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगने के बावजूद भी अस्पतालों में मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए सिलिंडर पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है. ऐसे में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट का मॉकड्रील महज दिखावा ही है. एक टेक्नीशियन पदस्थापित विदित हो कि जिले में सदर अस्पताल सहित पांच स्वास्थ्य संस्थानों में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाया गया था. सदर अस्पताल स्थित पीएम केयर फंड द्वारा लगाया गया 1000 एलपीएम ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट में महज एक टेक्नीशियन पदस्थापित है. जिसके कारण ऑक्सीजन प्लांट का संचालन एक शिफ्ट में ही हो पता था. लेकिन विगत 1 साल से सदर अस्पताल का आक्सीजन प्लांट भी तकनीकी खराबी एवं टेक्नीशियन के चले जाने के बाद से बंद है. ऐसे में ईडी का आदेश भी केवल कागजी निर्देश तक ही सिमट कर रह गया. नतीजतन एसएनसीयू एवं अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भर्ती नवजात शिशुओं एवं मरीजों को जंबो सिलिंडर से ही ऑक्सीजन की आपूर्ति की जाती है. इसके लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रतिमाह 1 लाख रुपए से अधिक राशि का भुगतान संबंधित एजेंसी को किया जाता है. पांच स्वास्थ्य संस्थानों में लगाया गया है ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट सदर अस्पताल सहित अनुमंडलीय अस्पताल जयनगर, फुलपरास, झंझारपुर एवं अररिया संग्राम स्थित ट्रामा सेंटर में पीएसए ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाया गया है. सदर अस्पताल एवं अनुमंडलीय अस्पताल जयनगर में पीएम केयर फंड द्वारा क्रमशः 1000 एवं 500 एलपीएम क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है. इसके अलावा अनुमंडलीय अस्पताल फुलपरास में डॉक्टर फॉर यू संस्था द्वारा 500 एलपीएम, अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर में मिथिला सहकारी दुग्ध समिति द्वारा 400 एलपीएम एवं अररिया संग्राम स्थित ट्रामा सेंटर में मेघा इंटरप्राइजेज द्वारा 300 एलपीएम क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है. विदित हो कि पीएसए प्लांट अस्पताल में ऑक्सीजन की उत्पादन एवं आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए स्थापित किया गया था. इसका सतत क्रियाशील रहना आवश्यक है. लेकिन सरकार द्वारा अभी तक कहीं भी टेक्नीशियन को प्रतिस्थापित नहीं किया गया है. बुधवार को 8 वां मॉकड्रिल फेल सिविल सर्जन डॉक्टर हरेंद्र कुमार ने कहा कि जब प्लांट ही क्रियाशील नहीं है तो माॅकड्रिल क्या होगा. इसके पूर्व पहला माॅकड्रिल 28 दिसंबर 2021, दूसरा माॅकड्रिल 25 फरबरी 2022, तीसरा माॅकड्रिल 16 जून 2022, चौथा माॅकड्रिल 8 नवंबर 2022, पांचवा माॅकड्रिल 24 नवंबर 2023, छठा माॅकड्रिल 12 सितंबर 2024, सातवां माॅकड्रिल 2 अप्रैल 2025 एवं आठवां माॅकड्रिल 24 सितंबर 2025 को होना था. जिला में आठवां माॅकड्रिल कहीं नहीं हो सका. सिविल सर्जन डॉक्टर हरेंद्र कुमार ने ने कहा किसी भी गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है. सदर अस्पताल के सभी बेड पर पाइपलाइन के माध्यम से ऑक्सीजन सप्लाई के लिए जोड़ा गया है. लेकिन आक्सीजन प्लांट क्रियाशील नहीं होने की स्थिति में सिलेंडर से आपूर्ति की जा रही है. जिला के सभी आक्सीजन प्लांट को क्रियाशील करने के लिए विभाग को सूचित किया गया है.
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