लीड ़ कंपनी प्रबंधन 15 दिनों के भीतर समिति की मांगों पर विचार करे : एसडीओ

कंपनी व विस्थापित समिति के बीच गतिरोध दूर करने को लेकर बैठकफो���ो : 17 चांद 7 : बैठक में शामिल अधिकारी व कंपनी के लोग. प्रतिनिधि प्रतिनिधि,चंदवामंगलवार को अंचलाधिकारी

कंपनी व विस्थापित समिति के बीच गतिरोध दूर करने को लेकर बैठकफोटो : 17 चांद 7 : बैठक में शामिल अधिकारी व कंपनी के लोग. प्रतिनिधि

प्रतिनिधि,चंदवा

मंगलवार को अंचलाधिकारी कार्यालय कक्ष में एसडीओ अजय कुमार रजक की मौजूदगी में किसान विकास श्रमिक स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड तथा एस्सार पावर प्लांट को टेक ओवर करनेवाली ओरिसा एलॉय स्टील प्रा लि. कंपनी प्रबंधन के लोगों के बीच बैठक हुई. इसमें कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही विस्थापित समिति व प्रबंधन के बीच गतिरोध को दूर करने का प्रयास किया गया. एसडीओ श्री रजक ने कंपनी प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर समिति की मांगों पर विचार करने की बात कही. बैठक के बाद समिति की ओर से अध्यक्ष प्रयाग गंझू ने अपना पक्षा रखा. कहा कि चतरो-अनगड़ा गांव में वर्ष 2007-08 में एस्सार पावर झारखंड लि. द्वारा पावर प्लांट स्थापित करने को लेकर 22 बिंदुओं पर विस्थापितों के साथ एकरारनामा किया गया था. जमीन अधिग्रहण भी की गयी थी, पर वर्ष 2012 में किसी कारणवश प्लांट ठप पड़ गया. इसके बाद वर्तमान में उक्त प्लांट को ओरिसा एलॉय स्टील प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने टेकओवर किया है. बगैर किसी अल्टीमेटम व पूर्व सूचना के ही विस्थापित रैयतों को इस नई कंपनी ने नौकरी से निकाल दिया. एसडीओ ने प्रबंधन को विस्थापितों की मांग को लेकर निर्देश दिया. इधर, समिति के लोगों ने कहा कि अगर हमारी मांग नहीं मानी गयी तो वे न्यायालय का रुख करेंगे. बैठक में सीओ जयशंकर पाठक, पुनि सह थाना प्रभारी रणधीर कुमार, प्रबंधन के राज सिंह, मुखिया दुर्गावती देवी, शीतमोहन मुंडा, दीपू सिन्हा समेत समिति के लोग मौजूद थे.

दूसरी समिति के लोगों ने जतायी

नाराजगी

इस बैठक के बाद आंदोलन कर रही श्रमिक सहयोग सहकारी समिति लिमिटेड महुआमिलान-जमीरा के सदस्य नाराज हैं. उक्त बैठक में उन्हें आमंत्रित नहीं करने पर उक्त समिति के लोगों ने नाराजगी जतायी है. समिति के अध्यक्ष पूर्व मुखिया बैजू मुंडा, संजीव कुमार, चंद्रदीप प्रसाद समेत अन्य ने कहा कि विस्थापित-प्रभावित क्षेत्र के रैयतों के अधिकार को लेकर वे लोग आंदोलन कर रहे हैं, पर बैठक में हमें ही नहीं बुलाया गया. यह हमारे हक-अधिकार का हनन है. हमारे पास सारे साक्ष्य मौजूद हैं. जब तक विस्थापित-प्रभावित को हक-अधिकार नहीं मिल जाता, हमारी लड़ाई जारी रहेगी.

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Published by: Sumit kumar

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