Jamshedpur news. बागबेड़ा के काचा गांव में संताली भाषा की ओलचिकी प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ

पहले ही दिन 50 से अधिक बच्चों ने किया नामांकन

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बागबेड़ा क्षेत्र के काचा गांव में रविवार को ओलचिकी इतुन आखड़ा (ओलचिकी शिक्षण केंद्र) का शुभारंभ किया गया. केंद्र का विधिवत शुभारंभ ओलचिकी के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू, दिशोम गुरु शिबू सोरेन, साहित्यकार व समाजसेवी बैजनाथ सोरेन एवं रामदास सोरेन की तसवीर पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर किया गया. मौके पर समाजसेवी भगीरथी सोरेन ने कहा कि ओलचिकी लिपि की दीपक को घर-घर जलाने के लिए पूरे देशभर में एक अभियान चल रहा है. मातृभाषा संताली के प्रति समाज में एक अलग रुझान है. समाज के नयी पीढ़ी भी अन्य भाषाओं के साथ-साथ संताली भाषा में पठन-पाठन कर रहे हैं. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने के बाद संताली भाषा की ओलचिकी लिपि से पठन-पाठन करने वालों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विभिन्न स्कूल व कॉलेजों में शिक्षकों की बहाली हो रही है. रोजगार की दृष्टिकोण से भी संताली भाषा अब उपयुक्त है. संताल समाज के लोगों से आग्रह है कि वे अपने बच्चों को डाक्टर, इंजीनियर व बैंकर्स जरूर बनायें, लेकिन मातृभाषा संताली व ओलचिकी लिपि को समृद्ध व विकसित बनाने के लिए अपने बच्चों को पठन-पाठन करने के लिए जरूर प्रोत्साहित करें.

यह शिक्षण केंद्र ग्रामीणों के सहयोग से सप्ताह में चार दिन संचालित किया जायेगा. रविवार को शिक्षण केंद्र के उद्घाटन के साथ ही 50 से अधिक बच्चों ने आना शुरू कर दिया. शिक्षण केंद्र में लखाई बास्के, माेहन हांसदा, हीरा टुडू व लक्ष्मी सोरेन द्वारा बच्चों को ओलचिकी लिपि में पढ़ना-लिखना सीखाया जायेगा. इस अवसर पर भगीरथी सोरेन, लालमोहन हांसदा, सुखलाल सोरेन, महेश्वर सोरे, राजू सोरेन, लखन सोरेन, प्रकाश सोरेन, अंजलि सोरेन, पार्वती सोरेन, संचिता सोरेन, पूजा टुडू, शिवालिका मार्डी, शुरूबली मार्डी समेत अन्य मौजूद थे.

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By PRADIP CHANDRA KESHAV

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