जय आदित्य की दोनों आंखें अब किसी और का जीवन करेंगी रोशन

पंचदेव कुमार, पटना ‘मरने के बाद भी आऊं दुनिया को काम मैं’ इस पंक्ति को सीवान जिले के जय आदित्य ने मरने के बाद अपनी दोनों आंखें दान

पंचदेव कुमार, पटना ‘मरने के बाद भी आऊं दुनिया को काम मैं’ इस पंक्ति को सीवान जिले के जय आदित्य ने मरने के बाद अपनी दोनों आंखें दान कर चरितार्थ किया है. अब ये आंखें किसी और के जीवन को रोशन करेंगी. 24 वर्षीय जय आदित्य बेतिया जिले में डेढ़ साल से खाद्यान विभाग में गुणवत्ता नियंत्रक के रूप में कार्यरत थे. 28 मार्च को वह बेतिया ऑफिस से गुणवत्ता जांच के लिए चनपटिया जा रहे थे. इस दौरान ट्रक ने उनकी बाइक में ठोकर मार दी. इससे घायल जय आदित्य पटना के मेदांता अस्पताल में 29 मार्च से 18 अप्रैल तक वेंटिलेटर पर जीवन मौत से जूझते रहे. 19 अप्रैल को आइजीआइएमएस में भर्ती कराया गया. इस बीच स्थिति में सुधार हुआ. वेंटिलेटर हट गया और खुद से सांस लेने लगे. लेकिन, अचानक फिर तबीयत बिगड़ने लगी. तब जय आदित्य ने परिजन से बातचीत के दौरान खुद की आखें मरने के बाद दान करने की बात कही थी. यह सुन परिजन फफक-फफक कर रो पड़े. इलाज के लिए लोग आर्थिक सहयोग भी कर रहे थे. इस बीच 28 अप्रैल की शाम जय आदित्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. परिजनों में कोहराम मच गया. फिर जय की इच्छा को पूरा करने के लिए परिजनों ने आपसी सहमति से उनकी दोनों आंखें आइजीआइएमएस में दान किया. इसके लिए डॉक्टर प्रमाणपत्र भी प्रदान किया. मृतक जय आदित्य के पिता वीरेंद्र कुमार सिंह सीवान जिले के गौतम बुद्धनगर तरवारा थाना क्षेत्र के दीनदयालपुर के रहनेवाले हैं. वह सम्राट अशोक क्लब के पूर्व जिलाध्यक्ष और वर्तमान में जिला संरक्षक है. मृतक का बड़ा भाई कुमार आदित्य ने बताया कि आदित्य की मौत के बाद परिवार बिखर गया है. लेकिन, यदि उसकी आंखों से किसी और के जीवन में खुशियां आयेगी, इस उद्देश्य से आदित्य की दोनों आंखें को दान किया गया है. जय आदित्य तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे. अब उसकी बस यादें रह जायेंगी. परिजनों ने बताया कि मंगलवार को पैतृक गांव में बौद्धिक रीति रिवाज से जय आदित्य का दाह-संस्कार किया गया़ इस दौरान शव यात्रा निकाली गयी़ इधर, पटना के रजीनिश भूषण मौर्य, सत्येंद्र कुमार मौर्य, रंधीर कुमार मौर्य सहित दर्जनों लोगों ने गहरी शोक संदेना व्यक्त की है़

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By PANCHDEV KUMAR

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