लोक अदालत में वादों का निबटारा कराना अभियोजन का भी दायित्व : जिला जज

दिसंबर माह में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियां अभी से प्रारंभ कर दी गयी है

औरंगाबाद शहर. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष राजकुमार द्वारा दिसंबर माह में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियां अभी से प्रारंभ कर दी गयी है. इस तैयारी के अंतर्गत जिलेभर में कार्यरत जिला अभियोजन पदाधिकारी एवं सभी सहायक अभियोजन पदाधिकारी तथा अनुमंडलीय अभियोजन पदाधिकारी के साथ बैठक करते हुए कई निर्देश दिये. बैठक में जिला अभियोजन पदाधिकारी दीपक कुमार सिन्हा, सहायक अभियोजन पदाधिकारी संजय कुमार सिंह, विनय कुमार, विकास कुमार, अनुमंडलीय सहायक अभियोजन पदाधिकारी तथा सोनम कुमारी, सुजीत सिंह, संतोष कुमार, राज किशोर सिंह, ज्योत्सना यामिनी, स्वाति कुमारी, प्रज्ञा प्रिया, निधि अवस्थी, आशा कुमारी, अमला सिंह, रंजन पासवान, रणवीर, सुबोध, प्रशांत सहित सभी सहायक अभियोजन पदाधिकारी शामिल हुए. जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल भी उपस्थित रहीं. जिला जज ने बैठक के दौरान उपस्थित सभी अभियोजन पदाधिकारियों से दिसंबर में होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण योग्य वादों को अपने स्तर से चिह्नित करते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया एवं कहा कि जिन सुलहनीय वादों में न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया गया है, परंतु पुलिस द्वारा आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है, अपने-अपने न्यायालय में वैसे वादों जिनमें पक्षकारों के बीच सुलहनामा लग गया हो एवं वाद सुलहनीय के श्रेणी में है और आरोप पत्र समर्पित नहीं हुआ है, उन्हें चिह्नित करते हुए आरोप-पत्र समर्पित करने हेतु अपने स्तर से संबंधित अनुसंधानकर्ता अथवा थानाध्यक्ष को निर्देश दें, जिससे कि वैसे चिह्नित वादों को अगली राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण की कार्रवाई संभव हो सके. जिला जज ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलहनीय वादों का निस्तारण कराना आपका भी दायित्व है और आपके स्तर से अभी से जितना प्रयास किया जायेगा उतना ही वादों का निस्तारण संभव हो सकेगा. सभी उपस्थित अभियोजन पदाधिकारी ने भी आश्वस्त किया कि अपने दायित्वों को बढ़-चढ़कर पूरा करेंगें जिससे कि औरंगाबाद जिला अगली राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलहनीय वादों के निस्तारण में अपनी ही रिकार्ड को तोड़ते हुए उच्च स्थान प्राप्त कर सके. अभियोजन पदाधिकारी ने यह भी आश्वस्त किया कि वैसे सुलहनीय मामलों को विशेष रूप से चिह्नित किया जायेगा जिसमें आरोप-पत्र लंबित है. इसके लिए सभी प्रक्रिया करते हुए संबंधित अनुसंधानकर्ता अथवा थानाध्यक्ष को निर्देश देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी.

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