मुनि श्री ने कहा कि यह एक प्रकार की लत है, जो एक बार जीवन में प्रवेश कर जाये, तो उससे मुक्त होना अत्यंत कठिन हो जाता है. यद्यपि मनुष्य के जीवन में अनेक प्रकार के व्यसन हो सकते हैं.
श्रेष्ठ कार्य का व्यसन हो, तो वह कल्याणकारी माना जाता है
यदि किसी श्रेष्ठ कार्य का व्यसन हो, तो वह कल्याणकारी माना जाता है, लेकिन कुछ व्यसन ऐसे हैं, जो मनुष्य को नैतिक, चारित्रिक और भावनात्मक रूप से दुर्बल बना देते हैं. जैन शास्त्रों में सात प्रमुख व्यसनों का उल्लेख किया गया है, मद्यपान, मांसभक्षण, पर स्त्री गमन, वेश्यागमन, चोरी, जुआ और शिकार करना. ये सातों व्यसन मनुष्य को पतन की ओर ले जाते है, तथा व्यक्ति को मर्यादा, सदाचार और आत्मसंयम के मार्ग से भटका देते हैं. विशेष रूप से चोरी, जुआ और शिकार जैसे व्यसन सामाजिक व नैतिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर जीवन को पतन की ओर ले जाते हैं.
व्यसनों से मुक्ति का लें संकल
्पमुनि श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को इन व्यसनों से मुक्त होने का संकल्प लेना चाहिए. आत्मकल्याण, परिवार की सुख-शांति और समाज की उन्नति के लिए इन सातों व्यसनों का प्रतिज्ञापूर्वक त्याग करना आवश्यक है. यह जानकारी गुणायतन मध्य भारत के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने दी.
पावागढ़ नाम पुनर्स्थापना, सांस्कृतिक व अस्मिता के संरक्षण का सराहनीय प्रयास
मुनि श्री ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाजिर नगर का नाम पुनः पावागढ़ किये जाने के निर्णय की सराहना करते हुए इसे भारतीय, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. मुनि श्री ने कहा कि कुछ मान्यताओं में इसे भगवान महावीर के निर्वाण स्थल के रूप में भी स्वीकार किया जाता है. भगवान महावीर से उसकी मूल पहचान को पुनर्स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा किया गया प्रयास स्वागत योग्य है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश की सांस्कृतिक अस्मिता को सुरक्षित रखने की दिशा में यह सराहनीय कार्य किया है.
