संतान दात्री के रूप में प्रसिद्ध हैं नावाबांध की मां दुर्गा

लक्ष्मीपुर प्रखंड क्षेत्र के नावाबांध गांव स्थित दुर्गा मंदिर की महिमा दूर-दूर तक प्रचलित है. बताया जाता है कि इस स्थान पर जो भी श्रद्धालु संतान प्राप्ति की मन्नतें मांगते हैं उनकी मन्नतें मां अवश्य पूरा करती है.

नित्यानंद सिंह, लक्ष्मीपुर . लक्ष्मीपुर प्रखंड क्षेत्र के नावाबांध गांव स्थित दुर्गा मंदिर की महिमा दूर-दूर तक प्रचलित है. बताया जाता है कि इस स्थान पर जो भी श्रद्धालु संतान प्राप्ति की मन्नतें मांगते हैं उनकी मन्नतें मां अवश्य पूरा करती है. इसलिए आस-पास के गांव सहित कई जिले के श्रद्धालु संतान दात्री के रूप में मां की आराधना करते हैं. कलश स्थापना के साथ नवरात्र के प्रथम दिन से ही पूजा प्रारंभ होने के साथ मेला का भी आयोजन शुरू हो गया है. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हर साल सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी पर मेला लगता है. इसमें श्रृद्धालुओं की काफी भीड़ लगती है. भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन का सहयोग भी मिलता है. नवरात्र के सप्तमी के दिन पट खुलने के बाद मां को खीर, पुरी का भोग लगाकर सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया जाता है और दशमी के दिन भंडारा किया जायेगा. दशहरा के अवसर पर लगने वाले मेला में बांस और लोहा से बने सामानों की बिक्री खूब होती है.

1875 में जमींदार ठाकुर ने करवाया था मंदिर का निर्माण

स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि जमींदार ठाकुर भूपनारायण सिंह को संतान नहीं थी. हर तरह की साधना-आराधना व चिकित्सकीय परामर्श के बाद भी उन्हें संतान प्राप्ति नहीं हुई. इस दौरान राजपुरोहित ने उन्हें आदि शक्ति मां दुर्गा की आराधना करने की सलाह दी. मां दुर्गा की आराधना के उपरांत उन्हें एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. मनोकामना पूर्ण होने के उपरांत उन्होंने 1875 ईस्वी में नावाबांध दुर्गा मंदिर की स्थापना कर धूमधाम से पूजा-अर्चना की थी. तब से लेकर आज तक शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है. ग्रामीणों ने बताया कि आज भी दुर्गा पूजा में होने वाले सभी तरह का खर्च ठाकुर साहब के परिजनों द्वारा किया जाता है.

12 फीट से अधिक ऊंची प्रतिमा का हो रहा निर्माण

पूजा समिति के सदस्य ने बताया कि इस बार यहां 12 फीट से अधिक ऊंची प्रतिमा का निर्माण कराया जा रहा है. इसके साथ ही अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी बनायी जा रही हैं. प्रतिमा का निर्माण वर्षों से मुंगेर जिला निवासी शुक्ला पंडित कर रहे हैं. मूर्तिकार शुक्ला पंडित ने बताया कि इस मंदिर में प्रतिमा निर्माण मेरे पूर्वज द्वारा ही किया जाता आ रहा है. मैं अपने खानदान का चौथी पीढ़ी हूं और इस मंदिर में प्रतिमा का निर्माण कर रहा हूं.

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