धान खरीद में सुस्ती : आठ प्रखंडों में अब तक एक छटांक धान की नहीं हुई खरीद

– 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल बेचने को मजबूर किसान – सहकारिता विभाग की उदासीनता से किसान परेशान,बिचौलिये मालामाल सुनील कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर जिले में इस वर्ष सरकारी

– 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल बेचने को मजबूर किसान – सहकारिता विभाग की उदासीनता से किसान परेशान,बिचौलिये मालामाल सुनील कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर जिले में इस वर्ष सरकारी धान खरीद की रफ्तार बेहद सुस्त दिखाई दे रही है. एक नवंबर से शुरू हुई प्रक्रिया के दस दिन बीत जाने के बावजूद अब तक आठ प्रखंडों में एक छटांक धान की भी खरीद नहीं हो पाई है. इनमें कांटी, बंदरा, मुरौल, कटरा, मड़वन, मुशहरी, साहेबगंज और सकरा प्रखंड शामिल हैं. प्रशासनिक निर्देशों और समितियों की तैयारियों के बावजूद किसान अपने धान की बिक्री को लेकर असमंजस में हैं. सहकारिता विभाग के अनुसार जिले में कुल 252 चयनित समितियों को धान खरीद की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनमें 244 प्राथमिक कृषि साख समितियां (पैक्स) और आठ व्यापार मंडल शामिल हैं. इन समितियों को 28 फरवरी तक धान खरीद का लक्ष्य पूरा करना है. इसके बावजूद अब तक केवल 29 किसानों से 226 मीट्रिक टन धान की ही खरीद हो सकी है. यह आंकड़ा लक्ष्य की तुलना में बेहद कम है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकारी खरीद व्यवस्था में समन्वय और सक्रियता की कमी बनी हुई है. कई किसानों ने बताया कि उन्हें अब तक न तो खरीद केंद्रों से कोई सूचना मिली है और न ही ऑनलाइन पंजीकरण में आसानी हो रही है. विभाग से जानकारी भी नहीं दी जा रही है. डीबीटी एग्रीकल्चर पोर्टल पर पंजीकरण और भुगतान प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों ने भी खरीद की गति को धीमा कर दिया है. ऐसे में किसान मजबूर होकर खुले बाजार में 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान बेच रहे हैं, जबकि सरकार ने सामान्य धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2369 रुपये और ग्रेड-ए धान के लिए 2379 रुपये तय किया है. इधर, जिला सहकारिता पदाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि इस बार धान खरीदारी की स्थिति पिछले वर्ष से अच्छी रहेंगी. प्रखंडों में विशेष अभियान चलाकर खरीद प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया गया है. जिन प्रखंडों में अब तक खरीद नहीं हुई है, वहां निगरानी बढ़ाई जाएगी और समितियों की जवाबदेही तय की जाएगी. बॉक्स किसान बदहाल, बिचौलिये हो रहें मालामाल इस स्थिति से बिचौलियों को भरपूर फायदा हो रहा है. वे किसानों से सस्ते दाम पर धान खरीद कर अधिक लाभ कमा रहे हैं. कांटी प्रखंड के किसान तेजनारायण सिंह ने बताया कि लगन का समय है. कई किसान धान और जमीन से उपजे फसल की बिक्री कर शादी-ब्याह में खर्च करते हैं. समितियों के धान नहीं खरीदने पर किसान स्थानीय गद्दीदार से 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल धान बेचने को मजबूर हैं. इधर, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते खरीद की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई, तो सरकारी योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा. प्रशासन के लिए यह चुनौती है कि वह इस सुस्ती को जल्द दूर कर किसानों को राहत पहुंचाए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Sunil kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >