संवाददाता, कोलकाता
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में वक्फ कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा में पीड़ित परिवारों की तालिका मांगी है. हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि मुर्शिदाबाद हिंसा में याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गयी तालिका व डीएम द्वारा बनायी सूची का मिलान करना होगा. हाइकोर्ट ने जिला प्रशासन को याचिकाकर्ता द्वारा दी गयी पीड़ितों की सूची का राज्य सूची से मिलान करने का आदेश दिया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी की खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि जिला मजिस्ट्रेट 14 दिनों के भीतर सूची की जांच कर उचित कार्रवाई करें.
गौरतलब है कि गुरुवार को राज्य की वकील प्रभन्या बंद्योपाध्याय ने कहा कि शमशेरगंज में हुई हिंसा में 285 पीड़ित परिवारों को चिह्नित किया गया है. राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक को 1.2 लाख रुपये के हिसाब से मुआवजा दिया गया है. उन्होंने बताया कि घटना में अब तक तीन करोड़ 39 लाख रुपये स्वीकृत किये गये हैं. उन्होंने बताया कि 119 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. उसके बाद, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने पूछा : क्या आपने सभी प्रभावित घरों की पहचान कर ली है. आपने रिपोर्ट तो जमा कर दी है, लेकिन क्या कदम उठाये हैं, इस बारे में जानकारी नहीं दी गयी? साथ ही वह पैसा कैसे दिया गया? इसकी कोई जानकारी नहीं दी गयी?
मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रियंका टिबड़ेवाल ने कहा : राज्य सरकार का कहना है कि उसने मुआवजा देना शुरू कर दिया है. लेकिन पीड़ित कौन हैं, उनकी पहचान कैसे की गयी, क्या इसके लिए कोई वेबसाइट खोली गयी? इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी. इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि प्रभावित लोगों की सूची याचिकाकर्ता के वकील द्वारा राज्य सरकार को दी जाये और फिर जिला प्रशासन राज्य सरकार से की सूची से इसका मिलान करेगा और मुर्शिदाबाद के जिला मजिस्ट्रेट स्वयं इस सूची का सत्यापन करेंगे और 14 दिनों के भीतर कार्रवाई करेंगे.
मामले की अगली सुनवाई 21 नवंबर को होगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
