भगवान श्रीराम के जन्म की कथा का हुआ वर्णन

- कमलडीह में छह दिवसीय संगीतमय भागवत कथा जारी प्रतिनिधि, मुरलीपहाड़ी. नारायणपुर प्रखंड के कमलडीह में आयोजित छह दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन राम जन्मोत्सव मनाया गया. इस

– कमलडीह में छह दिवसीय संगीतमय भागवत कथा जारी प्रतिनिधि, मुरलीपहाड़ी. नारायणपुर प्रखंड के कमलडीह में आयोजित छह दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन राम जन्मोत्सव मनाया गया. इस मौके पर श्रद्धालु भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों के जन्म की कथा का श्रवण कर झूम उठे. कथावाचक सुमन उपाध्याय ने राम जन्म प्रसंग की व्याख्या की. कहा कि तीन कल्प में तीन विष्णु का अवतार हुआ है और चौथे कल्प में साक्षात भगवान श्रीराम माता कौशल्या के गर्भ से अवतरित हुए है. श्रीराम जन्म प्रसंग से पूर्व सती प्रसंग की व्याख्या की. कहा कि एक बार माता सती भगवान शंकर बिना बताए ही माता सीता का रूप धारण कर भगवान राम की परीक्षा लेने चल गयी, लेकिन भगवान श्रीराम ने उन्हें पहचान कर पूछ लिया, हे माता आप अकेले. इसके बाद भगवान शंकर इस सोच में पड़ गए कि सती माता सीता का रूप धारण कर भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने चली गयी. अब ऐसी स्थिति में मैं सती से प्रेम कैसे कर सकता. आगे कहा कि माता सती के पिता राजा दक्ष के यहां यज्ञ हो रहा था, जिसमें शामिल होने के लिए माता सती ने भगवान से अपनी इच्छा जाहिर की थी, जिस भगवान शंकर ने माता सती से कहा कि तुम्हारे पिता ने यज्ञ में आने के लिए हमलोगों को आमंत्रित नहीं किया है. हालांकि माता-पिता, गुरु एवं मित्र के घर जाने के लिए आमंत्रण की जरूरत नहीं होती है, जहां मान नहीं हो वहां बिन बुलाए जाना भी नहीं चाहिए, जिसे सुन माता सती संकोच में पड़ गयीं, लेकिन भगवान शंकर ने ध्यान लगाकर सती ने भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने की बातें जान ली. मौके पर आचार्य समाकांत पांडे, सिंगर सुजीत पांडे, श्री सत्यनारायण उपाध्याय, यजमान गोपाल रवानी आदि मौजूद थे.

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Author: UMESH KUMAR

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