आरा जंक्शन : राजस्व के मामले में तीसरा, पर यात्री सुविधाएं जीरो

प्रतिनिधि, आरा आरा जंक्शन राजस्व देने के मामले में पटना और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बाद तीसरा सबसे बड़ा स्टेशन है, लेकिन यात्रियों को सुविधा देने के मामले में फिसड्डी

प्रतिनिधि, आरा आरा जंक्शन राजस्व देने के मामले में पटना और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के बाद तीसरा सबसे बड़ा स्टेशन है, लेकिन यात्रियों को सुविधा देने के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा है. स्टेशन के मुख्य गेट के आमने सामने फुटपाथी दुकानों से यात्रियों की परेशानी बढ़ी स्टेशन के मुख्य द्वार के आमने-सामने फुटपाथी दुकानों के कारण एवं बीच रास्ते में ऑटो के खड़ा रहने से हर दिन जाम लग रहा है, जिससे यात्रियों को जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हॉल तो यह है की मुख्य द्वार सिकुड़कर आधा से भी कम हो गया है. इस सड़क पर खासकर प्रवेश द्वार से बाजार, कॉलेज एवं स्टेशन चौक से आगे तक के क्षेत्र में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है. जाम हटने पर भी वाहन रेंगकर किसी तरह निकल पाते हैं. स्थिति इतनी परेशानी भरी हो गयी है कि लोग इस रास्ते में आना नहीं चाहते हैं, लेकिन कोई अन्य विकल्प नहीं रहने के कारण इस सड़क से होकर गुजरने की मजबूरी है. यहां विकराल होती जाम की समस्या के कारण किसी की ट्रेन छूटती है, तो किसी की परीक्षा. अतिक्रमण बना नासूर अच्छा खासा स्टेशन का चौड़ा मुख्य द्वार और सड़क पर अस्थायी तौर पर दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है. स्टेशन के बाहर भी अतिक्रमण ठेला पर फल, सब्जी, चाट वगैरह बेचनेवाले लोग ठेला को सड़क पर ही खड़ा कर दुकानदारी करते हैं. बढ़ते वाहनों की संख्या के बीच उपरोक्त कारणों से यहां जाम लगना आम हो गया है. आश्चर्य इस बात की है कि सारी परेशानी जानते हुए और देखते हुए भी प्रशासन सड़क पर बाइक व छोटे वाहनों के पड़ाव और दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण पर मौन है. लोगों को इस परेशानी से मुक्त करने और यातायात सुचारू रखने को लेकर प्रशासन पूरी तरह उदासीन है. अभी छठ में लोगों की बढ़ती भीड़ और वाहनों के अत्यधिक बोझ से स्थिति और भी विकट हो गयी है. चार पहिया वाहनों को इस सड़क पर गुजरने में बड़ी परेशानी होती है. सड़क पर खड़े किये जाते हैं वाहन : स्टेशन परिसर से लेकर मुख्य सड़क पर प्रायः जाम रहने के दो प्रमुख कारण है. एक तो चौक से बाजार की ओर जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे दुकानें सजती है. सड़क का दोनों किनारा पूरी तरह अतिक्रमित है. दुकानदार अपने सामान को सड़क किनारे फैलाकर रखते है. दर्जनों अस्थाई दुकानें बन गई है जिसमें सब्जी फल व अन्य चीजें बेची जाती है. स्टेशन प्रबंधक बोले, होती है कार्रवाई स्टेशन परिसर में फुटपाथ की दुकानें नहीं लगती. यात्रियों की शिकायत मिलने पर जहां कहीं रिक्शा, ऑटो एवं नये दौर में चल रही बैटरी वाली टुकटुकीय गाड़ियों से काबू पाने के लिए आरपीएफ पुलिस कार्रवाई करती है.

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Author: KUMAR RAVINDRA

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