Psychology Facts: इंसानी दिमाग और व्यवहार को समझना बहुत ही दिलचस्प काम है. अक्सर हम किसी से बात करते हैं और महसूस करते हैं कि सामने वाला व्यक्ति हमारी आंखों में नहीं देख रहा है. मनोविज्ञान (Psychology) के अनुसार, किसी व्यक्ति का आपसे बात करते समय नजरें चुराना कोई सामान्य बात नहीं है. इसके पीछे उसके मन की स्थिति और स्वभाव के कई राज छिपे होते हैं. बॉडी लैंग्वेज के जानकारों का मानना है कि हमारी आंखें वह सब कुछ कह देती हैं जो हम बोलकर नहीं बता पाते. ऐसे में इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि आखिर कोई व्यक्ति आपसे नजरें क्यों चुराता है और उसके पीछे की 3 सबसे बड़ी वजहें क्या हो सकती हैं.
भरोसे की कमी होना
साइकोलॉजी के अनुसार जो लोग स्वभाव से बहुत शर्मीले होते हैं या जिनमें खुद पर भरोसे की कमी होती है, वे अक्सर नजरें मिलाकर बात नहीं कर पाते. उन्हें ऐसा लगता है कि आंखों में देखने से उनकी घबराहट सामने वाले को पता चल जाएगी. ऐसे लोग अपनी बात कहने के लिए शब्दों का सहारा तो लेते हैं, लेकिन उनकी नजरें हमेशा झुकी रहती हैं.
झूठ बोलना या कुछ छिपाना
अक्सर लोग नजरें चुराने को झूठ से जोड़कर देखते हैं. जब कोई व्यक्ति झूठ बोल रहा होता है, तो वह पकड़े जाने के डर से नजरें मिलाने से बचता है. इसके अलावा अगर किसी व्यक्ति के मन में कोई बात दबी है या उसने कोई गलती की है, तो वह आपसे आंखें नहीं मिला पाएगा. उसे डर रहता है कि उसकी आंखें उसका राज खोल देंगी.
बातचीत में मन न लगना
अगर कोई व्यक्ति बार-बार इधर-उधर देख रहा है और आपसे नजरें नहीं मिला रहा, तो इसका एक मतलब यह भी हो सकता है कि उसे आपकी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है. वह आपकी बातों से ऊब रहा है और उस बातचीत को खत्म करके वहां से जाना चाहता है.
मन की परेशानी और बेचैनी
जब कोई व्यक्ति मन से परेशान या दुखी होता है, तो उसके लिए किसी एक जगह ध्यान लगाना मुश्किल होता है. ऐसी स्थिति में वह बात तो करता है, लेकिन उसकी नजरें टिकी नहीं रहतीं. यह इस बात का इशारा है कि वह व्यक्ति उस समय किसी गहरी चिंता में डूबा हुआ है.
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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
