Financial Tips: बिटिया को शुरू से ही सिखाएं बचत की तरकीब, ताकि जीवन में बने आत्मनिर्भर

अक्सर, वित्त संबंधी जरूरतों के लिए महिलाओं को परेशान होना पड़ता है. बेहतर होगा कि आप अपनी बेटी को शुरू से फाइनेंशियल ट्रेनिंग दें, ताकि आगे चलकर उसे इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े.

Financial Tips: दुनिया में ऐसे कई अध्ययन हो चुके हैं, जिनसे पता चलता है कि अनपढ़ या कम पढ़ी-लिखी महिलाओं की बात तो छोड़ ही दीजिए, डिग्रीधारी प्रोफेशनल और खुद एंटरप्रेन्योर होने के बावजूद महिलाएं खुद के पास पैसे रखने के मामले में पीछे रह जाती हैं. अक्सर, अपनी वित्त संबंधी जरूरतों के लिए उन्हें परेशान होना पड़ता है. साथ ही यह भी देखा जाता है कि उनके साथ मनी फ्रॉड पुरुषों की तुलना में ज्यादा होते हैं. बेहतर होगा कि आप अपनी बेटी को शुरू से हर प्रकार की फाइनेंशियल ट्रेनिंग दें, ताकि आगे चलकर उसे इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े.

बचत का पाठ

बेटी स्कूल जाने लगे तभी से उसका बैंक अकाउंट खुलवा दें. उसे इस बात के लिए प्रेरित करें कि पॉकेट मनी या विशेष अवसरों जैसे जन्मदिन या विभिन्न अन्य अवसरों पर माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी या नाना-नानी से मिले शगुन के रुपयों को इधर-उधर खर्च न करके वह अपने बैंक खाते में जमा कराए. बेटी इंटर्नशिप या जॉब या फिर स्टार्टअप शुरू करे, तो पहले ही महीने से कमाई या सैलरी का एक हिस्सा बैंक खाते में जमा करवाएं. यह रकम कम से कम 50 फीसदी हो. धीरे-धीरे जब उसका बैंक बैलेंस बढ़ेगा, तो उसे इसमें आनंद आने लगेगा.

निवेश की सीख

बेटी के पास फिक्स्ड इनकम आने लगे, तो हर महीने फिक्स बचत और उस पर अच्छा ब्याज या रिटर्न मिले, यह सुनिश्चित करें. इसके लिए उसका डाकघर में या किसी बैंक में रैकरिंग डिपॉजिट खाता खोलें. किसी प्रतिष्ठित म्युचुअल फंड में एसआइपी शुरू करवाएं. एक ठीक-ठाक रकम जमा हो जाये, तो ज्यादा ब्याज दर वाले फिक्स डिपॉजिट में उसे पैसा जमा देने को कहें. जब आप अपनी बेटी को निवेश के विभिन्न तरीके बतायेंगे,अच्छे रिटर्न की सीख देंगे और पैसों को बचत के साथ-साथ निवेश करना सिखायेंगे, तो उसे धीरे-धीरे इन बातों की समझ होने लगेगी और वह खुद भी रिसर्च करना शुरू कर देगी.

आय-व्यय का हिसाब

बेटी को अपनी आय और व्यय का हिसाब, किस बैंक में, डाकघर, म्युचुअल फंड, बीमा कंपनी में कितने रुपए जा रहे हैं, कितने रुपए खर्च हो रहे हैं और कितने हर महीने आ रहे हैं, यह सारा ब्योरा एक नोटबुक में लिखकर रखने को कहें.

बीमा का महत्व

बेटी को बताएं कि हेल्थ इंश्योरेंस और एक्सीडेंट इंश्योरेंस पॉलिसी लेना फिजूलखर्ची नहीं, बल्कि जरूरत है. आज के दौर में बीमारियां बढ़ने, इलाज पर मोटा खर्च आने और जीवन की अनिश्चितता बढ़ने की सूरत में उनका बहुत ज्यादा महत्व है. इन्हें खरीदने में कंपनियों के चयन से लेकर सही राशि का बीमा लेने का मापदंड किसी अनुभवी वित्त विशेषज्ञ या विश्वासी और अनुभवी बीमा एजेंट के माध्यम से उसे समझाएं.

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वित्त जगत की खबर

बेटी को बताएं कि उसका वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होना, समझदार होना और वित्त जगत की खबरों से अद्यतन रहना कितना जरूरी है. आज के आर्थिक युग में ‘बिन पैसा सब सून’ यह बात उसे नियमित रूप से विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से बताएं. आजकल बच्चों को बैंकों की तरफ से आसानी से डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड मिल जाते हैं. जहां तक संभव हो, उन्हें क्रेडिट कार्ड लेने से हतोत्साहित करें. लेकिन, उसके लिए यह उपयोगी हो, तो उसे बेहद सावधानी से क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने की हिदायत दें.

फिजूलखर्ची से मना करें

अखबार हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आजकल ऑनलाइन जुआ के विज्ञापन खूब आते हैं. इनमें बच्चों को ईजी मनी कमाने के लिए ललचाया जाता है. अपने बच्चों को इन जालसाजों से बचाएं. उन्हें किसी भी हालत में ऐसे गेम ना खेलने दें. शुरू से ही बेटी को सीख दें कि पैसे की बचत बेहद जरूरी है. सुख-सुविधाओं के लिए, काम और जीवनयापन को आसान बनाने के लिए उपकरण, वाहन आदि खरीदने के लिए पैसे खर्च करना गलत नहीं है, लेकिन खुद को अमीर दिखाने, दोस्तों से बेहतर दिखने की होड़ में पैसों को उड़ाना आदि गलत है. जरूर से ज्यादा खर्च करना मूर्खता है. विशेष रूप से लोन लेकर ऐशो-आराम के सामान खरीदना, तो बिल्कुल नासमझी है.

इनपुट : शिखर चंद जैन, सीए जितेंद्र मित्तल से बातचीत पर आधारित.

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Published by: Devendra kumar

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