Name of Cheetah: भारत लाए गए चीतों के नाम जानें, पीएम मोदी ने किया नामकरण

Name of Cheetah: भारत में चीतों के विलुप्त होने के सात दशकों बाद 8 चीतों को अफ्रीकी देश नामीबिया से लाया गया. ऐसा पहली बार है जब किसी जनवर को एक महाद्विप से दूसरे जगह लाया गया है. इन सभी चीतों के नाम रखे लिए गए है.

Name of Cheetah: कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी देश नामीबिया (African country Namibia) से लाए गए 8 चीतों का नाम सामने आया है. आठ चीतों के नाम ओबान, फ्रेडी, सावन्नाह, आशा, सिबली, सैसा और साशा हैं. जिनमें एक मादा चीते का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र (Prime Minister Narendra Modi )मोदी ने ‘आशा’ रखा है. बता दें कि जबकि, बाकी अन्य चीतों के नाम नामीबिया में ही रखे गए थे.

7 दशक बाद भारत में दिखेगा चीता

भारत में चीतों के विलुप्त होने के सात दशकों बाद केंद्र सरकार ने यह कदम उठाया है. इन चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाया गया है. केएनपी लाए गए चीतों में से पांचों मादा और तीन नर शामिल हैं. जिन्हें पीएम मोदी अपने जन्मदिन पर केएनपी के क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा.

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भारत लाए जाने वाले चीतों में से पांचों मादा की उम्र दो से पांच साल के बीच है, जबकि नर चीतों की आयु 4.5 साल से 5.5 साल के बीच है. जिन्हें 30 दिनों तक क्वरंटीन पीरियड में रखा जाना है, वहीं, इन चीतों को 2 से 3 दिनों में खाने के लिए मीट दिया जाएगा.

फिलहाल द. अफ्रीका के विशेषज्ञों रखेंगे नजर

केएनपी में इन चीतों के लिए 25 वर्ग किमी का घेरा बनाया गया है. इनकी देखभाल के लिए दक्षिण अफ्रीका के वन्यजीव विशेषज्ञों को भी भारत बुलाया गया है. ताकि वे इनपर नजर रख सके. विशेषज्ञ की मानें, तो भारतीय मौसम को लेकर यहां चीतों को समस्या हो सकती है. वहीं, चीतों को 2 से 3 महीने तक यहां के माहौल में ढलने का समय लग सकता है.

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वन्य विशेषेज्ञों के अनुसार भारत लाए जा रहे चीतों के गले में एक सैटेलाइट वीएचएफ रेडिया कॉलर लगाया गया है, जिससे इनपर नजर रखी जा सकेगा. वहीं, केएनपी के आस पास के गांवों में भी अन्य मवेशियों का टीकाकरण किया गया है ताकि चीतों के संपर्क में आने से किसी तरह का संक्रमण न फैल सके.

भारत और साउथ अफ्रीका का मौसम एक समान

बताते चले कि भारत और साउथ अफ्रीका के मौसम का तापमान एक समान ही रहता है, जिस कारण केंद्र सरकार ने इन चीतों को अफ्रीका से भारत लाने का फैसला किया है. केएनपी की बात करें तो वाहं अधिकतम तापमान 42 डिग्री और न्यूनतम तापमान 6 से 7 डिग्री सेल्सियस तक रहता है.

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दुनिया में ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी वन्य जीव को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में भेजा जा रहा है.

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