Health Tips: अक्सर हमारे घरों में रात की बची हुई रोटियों को बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है या फिर जानवरों को दे दिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसे आप कचरा समझ रहे हैं, वो असल में आपकी सेहत के लिए बहुत काम की चीज है. आयुर्वेद और एक्सपर्ट्स की मानें तो गेहूं की रोटी जब 12 से 15 घंटे पुरानी हो जाती है, तो इसमें ऐसे गुण पैदा हो जाते हैं जो ताजी रोटी में भी नहीं होते. बासी रोटी खाने से शरीर की कई पुरानी बीमारियां ठीक हो सकती हैं और यह आपके शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करती है. तो आइए जानते हैं कि बासी रोटी खाने से हमें कौन से बड़े फायदे मिलते हैं और इसे खाने का सही तरीका क्या है.
क्या बासी रोटी खाना सच में फायदेमंद है?
जी हां, बिल्कुल. जब गेहूं की रोटी 12 से 15 घंटे पुरानी हो जाती है, तो उसमें गुड बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं. ये बैक्टीरिया हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर की बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं.
बासी रोटी खाने से शुगर (Diabetes) कैसे कंट्रोल होती है?
बासी रोटी को ठंडे दूध के साथ खाने से शरीर का ब्लड शुगर लेवल सही रहता है. शुगर के मरीजों के लिए यह एक बहुत ही सस्ता और असरदार तरीका है. इसे सुबह के नाश्ते में खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.
क्या बासी रोटी खाने से वजन भी बढ़ता है?
हां, जो लोग बहुत दुबले-पतले हैं और अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए बासी रोटी बहुत अच्छी है. यह शरीर को जरूरी एनर्जी देती है और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है.
पेट की समस्याओं में यह कैसे मदद करती है?
बासी रोटी में फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है. अगर आप अक्सर गैस, कब्ज या एसिडिटी से परेशान रहते हैं, तो बासी रोटी को दूध के साथ खाएं. यह पेट को अंदर से साफ रखती है और पाचन को दुरुस्त करती है.
बासी रोटी को खाने का सबसे सही तरीका क्या है?
बासी रोटी को खाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इसे सुबह के समय ठंडे या गुनगुने दूध के साथ खाया जाए. ध्यान रहे कि रोटी 12 से 15 घंटे से ज्यादा पुरानी न हो.
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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
