Do You Know: हम जब भी शॉपिंग मॉल जाते हैं, तो घर से यही सोचकर निकलते हैं कि, ‘यार आज बस काम का ही सामान लेकर वापस आना है’. लेकिन जब हम मॉल से वापस घर लौटकर आते हैं, तो हाथों में बड़े-बड़े थैले होते हैं और पर्स भी खाली हो चुका होता है. अगर आपके साथ भी अक्सर ऐसा होता है, तो यह सिर्फ एक इत्तेफाक बिलकुल भी नहीं है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जिस समय से हम मॉल में एंटर करते हैं, मॉल वाले हमारे दिमाग से खेलना शुरू कर देते हैं. उनके पास कई सीक्रेट ट्रिक्स होती हैं, जिनमें फंसकर अक्सर हम न चाहते हुए भी बेकार की चीजें मॉल से उठा लाते हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी ही 5 ट्रिक्स और चालाकियों के बारे में बताने जा रहे हैं, ताकि अगली बार आप इनके इस जाल में फंसकर अपने पैसों को बेकार की चीजें खरीदने में बर्बाद न कर दें.
भूलभुलैया जैसे रास्ते और सीढ़ियों का कमाल
आपको शायद यह जानकर हैरानी हो लेकिन, मॉल का नक्शा इस तरह बनाया जाता है कि आप सीधे बाहर न निकल सकें. आप इसे एक तरह की भूलभुलैया समझ सकते हैं. आपने ध्यान दिया होगा कि ऊपर जाने वाली एस्केलेटर तो तुरंत मिल जाती है, लेकिन नीचे आने वाली सीढ़ी के लिए आपको पूरा फ्लोर घूमकर जाना पड़ता है. मॉल वाले ऐसा जानबूझकर करते हैं ताकि आप ज्यादा से ज्यादा दुकानों के सामने से गुजरें. जितनी दुकानें आपकी नजरों के सामने आएंगी, आपका मन किसी न किसी चीज को खरीदने के लिए उतना ही ज्यादा ललचाएगा.
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बहुत बड़ी शॉपिंग ट्रॉली पकड़ा देना
मॉल के गेट के अंदर घुसते ही सबसे पहले हमें एक बड़ी सी ट्रॉली या बास्केट थमा दी जाती है. यह भी एक बहुत ही बड़ा और चालाकी से खेला गया माइंड गेम है. जब हम इतनी बड़ी खाली ट्रॉली लेकर मॉल में घूमते हैं, तो हमें खुद अजीब सा लगता है. हमारा दिमाग सोचता है कि ‘अभी तो ट्रॉली खाली है, थोड़ी और शॉपिंग कर लेते हैं’. इसी खालीपन को भरने के चक्कर में हम उन चीजों को भी खरीद लेते हैं जिनकी हमें कोई जरूरत नहीं होती.
जरूरत का सामान सबसे पीछे छुपाना
दूध, ब्रेड, आटा, या कपड़े जैसी जो चीजें हमारी रोज की जरूरत की होती हैं, उन्हें मॉल वाले हमेशा सबसे पीछे या सबसे ऊपर वाली ट्रे पर रखते हैं. उन्हें पता है कि इस सामान को लेने के लिए कस्टमर मॉल के आखिरी कोने तक जरूर जाएगा. अब आप इनकी चालाकी देखिए, वहां तक पहुंचने के रास्ते में वो महंगे खिलौने, परफ्यूम, और चमकते हुए कपड़े सजाकर रख देते हैं. जब तक आप अपने काम के सामान तक पहुंचते हैं, तबतक रास्ते में ही कई फालतू चीजें आपकी ट्रॉली में आ चुकी होती हैं.
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दीवार पर घड़ी और खिड़कियों का न होना
दुनिया के लगभग किसी भी बड़े मॉल में आपको दो चीजें कभी नहीं दिखेंगी, पहली दीवार घड़ी और दूसरी बाहर का नजारा और लाइट दिखाने वाली खिड़कियां. मॉल के अंदर का माहौल ऐसा बनाया जाता है जहां आपको समय का अंदाजा ही न रहे. बाहर धूप है या रात हो गई, आपको कुछ पता नहीं चलता. जब समय का होश नहीं रहता, तो इंसान बिना किसी जल्दबाजी के आराम से घूमता है. आसान शब्दों में कहें तो, आप मॉल में जितना ज्यादा समय बिताएंगे, उतना ही ज्यादा आप पैसा खर्च करेंगे.
बिलिंग काउंटर के पास भी बिछाया जाता है जाल
जब आप अपनी शॉपिंग पूरी करके बिल चुकाने के लिए लाइन में खड़े होते हैं, तो वहां भी एक आखिरी जाल आपका इंतजार कर रहा होता है. बिलिंग काउंटर के पास छोटी-छोटी और कम कीमत वाली चीजें रखी होती हैं, जैसे चॉकलेट, च्युइंग गम, की-चैन या छोटे गैजेट्स. लाइन में खड़े-खड़े जब इंसान बोर होता है, तो उसकी नजर इन पर पड़ती है. हम सोचते हैं कि ‘चलो, 20-30 रुपये की ही तो बात है’ और उसे उठा लेते हैं. इसे ही कहा जाता है बिना सोचे-समझे की गई शॉपिंग, और इसी ट्रिक का इस्तेमाल करके मॉल वाले हर दिन लाखों रुपये भी कमा लेते हैं. अगर आप अपने पैसे बचाना चाहते हैं, तो अगली बार जब भी मॉल जाएं, तो घर से एक कागज पर लिस्ट बनाकर ले जाएं कि क्या-क्या खरीदना है. अगर आपको थोड़ा ही सामान लेना हो तो बड़ी ट्रॉली की जगह हाथ में उठाने वाली छोटी थैली का ही इस्तेमाल करें. ऐसा करने से आपके ढेर सारे पैसे बेवजह खर्च होने से बच जाएंगे.
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