Chanakya Niti: ये 4 कला सीख लें तो कभी नहीं टूटेंगे, आपको इस्तेमाल करने वालों की नानी याद आ जाएगी

Chanakya Niti: चाणक्य नीति के अनुसार जो इंसान अपनी भावनाओं और निर्णयों को संभालना सीख लेता है, उसे कोई आसानी से इस्तेमाल नहीं कर सकता. जानिए वह 4 कला जो आपको मजबूत बनाती हैं.

By Sameer Oraon | January 7, 2026 10:03 PM

Chanakya Niti: दुनिया में ज्यादातर इंसान ऐसा है जो कभी न कभी किसी के हाथों इस्तेमाल जरूर हुआ है. कई लोग उन गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ जाते हैं लेकिन बहुत लोग ऐसे भी होते हैं जो उन गलतियों को नहीं पहचान पाते हैं और बार बार इस्तेमाल होते रहते हैं. लेकिन आचार्य चाणक्य ने हजारों साल पहले ही उन कॉमन गलतियों के बारे में बता चुके थे जो इंसान अक्सर दोहरता है. आज हम उन्हीं आदतों के बारे में बताएंगे जो ज्यादातर लोग इस्तेमाल होने से पहले गलती करते हैं. आइये जानते हैं वह कौन कौन सी चीजें हैं.

भावनाओं पर नियंत्रण ही असली ताकत

चाणक्य नीति में साफ तौर पर कहा गया है कि जो व्यक्ति हर बात दिल को दिल पर ले लेता है, वह सबसे पहले टूटता है. ऐसे लोग दूसरों की बात, तानों या व्यवहार से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं. यही कमजोरी सामने वाला इंसान पहचान लेता है कि इसे यूज करना आसान है. अगर आप अपनी भावनाओं को काबू में रखना सीख लेते हैं तो कोई आपको डर, लालच या गुस्से से कंट्रोल नहीं कर सकता.

हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें

आज के समय में ज्यादातर लोग कुछ भी अपनी बारे में सुन लेते हैं तो तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं. इसमें 3 चीजें सबसे प्रमुख है. पहला गुस्से में जवाब देना, दूसरा दुख में फैसला और तीसरा खुशी में वादा. चाणक्य नीति कहती है कि तुरंत प्रतिक्रिया देना मूर्खता की निशानी है. जो इंसान सोच-समझकर बोलता है, सही समय का इंतजार करता है और हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देता, वही असल में मजबूत माना जाता है. ऐसे व्यक्ति को न ऑफिस में आसानी से दबाया जा सकता है और न ही रिश्तों में.

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जरूरत से ज्यादा भला करना भी नुकसानदेह

चाणक्य साफ कहते हैं कि हर किसी की भला करने की चाहत इंसान को कमजोर बना देती है. जो हर किसी की मदद बिना सोचे-समझे करता है, वही सबसे ज्यादा शोषण का शिकार होता है. समझदारी इसी में है कि कहां ‘हां’ कहना है और कहां ‘ना’. जो व्यक्ति समय पर ‘ना’ कहना सीख लेता है, वही खुद की कीमत समझता है.

खुद की कीमत पहचानना जरूरी

चाणक्य नीति के अनुसार, जब तक आप खुद को हल्के में लेंगे, दुनिया भी आपको हल्के में ही लेगी. आत्मसम्मान और सीमाएं तय करना बेहद जरूरी है. जो इंसान अपनी सीमाएं तय कर लेता है वह न भावनात्मक रूप से टूटता है, न मानसिक रूप से कमजोर पड़ता है और न ही कोई उसका फायदा उठा पाता है.

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