Chanakya Niti: क्या आप जानते हैं कि आपकी आज की गई एक छोटी सी गलती आपके बुढ़ापे को नर्क बना सकती है? आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो इंसान जवानी के नशे में चूर होकर भविष्य को भूल जाता है, उसे उम्र के आखिरी पड़ाव पर दाने-दाने के लिए तरसना पड़ता है. बुढ़ापा सुकून से बीतेगा या दूसरों की ठोकरें खाकर, यह पूरी तरह आपके आज के फैसलों पर निर्भर करता है. अगर आप नहीं चाहते कि आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पड़े, तो चाणक्य की इन कड़वी सच्ची बातों को गांठ बांध लें. आइए जानते हैं वे कौन से काम हैं जो आपको आज ही शुरू कर देने चाहिए.
धन की बचत करना बहुत जरूरी है
आचार्य चाणक्य के अनुसार जो इंसान पैसे की इज्जत नहीं करता है, बुरा वक्त उसे पूरी तरह बर्बाद कर देता है. जवानी के समय में शौक पूरे करने के चक्कर में अपनी सारी कमाई को उड़ाना सबसे बड़ी मूर्खता मानी जाती है. आपको यह हमेशा याद रखना चाहिए कि बुढ़ापे में सगा बेटा भी साथ छोड़ सकता है, लेकिन आपकी जमा की हुई पूंजी हमेशा आपका साथ निभाएगी.
अपनी सेहत का हमेशा खास ख्याल रखें
जवानी के दिनों में अक्सर हम अपने शरीर को बहुत मजबूत समझते हैं और गलत खान-पान की आदत डाल लेते हैं. चाणक्य कहते हैं कि जिस शरीर से आप जीवन भर काम लेते हैं, उसकी रक्षा करना आपकी सबसे पहली जिम्मेदारी है. आज की गई सेहत के प्रति लापरवाही कल अस्पतालों के चक्कर और दवाइयों का भारी खर्च बन सकती है इसलिए व्यायाम जरूर करें.
बच्चों को अच्छे संस्कार देना न भूलें
अपने बच्चों के लिए केवल संपत्ति छोड़कर जाना काफी नहीं होता है, उन्हें सही संस्कार देना भी बहुत जरूरी है. अगर आपकी संतान संस्कारी और समझदार नहीं है, तो वह आपकी जीवन भर की मेहनत की कमाई को एक पल में उजाड़ देगी. जवानी में अपने बच्चों को पूरा समय दें और उन्हें सही रास्ता दिखाएं ताकि बुढ़ापे में वे आपको बोझ न समझें बल्कि सहारा बनें.
अपनी गुप्त बातें किसी को न बताएं
हर जगह अपनी सफलता और अपनी ताकत का ढिंढोरा पीटना बहुत गलत आदत होती है. चाणक्य नीति के अनुसार एक बुद्धिमान इंसान को अपनी कमजोरी और अपने भविष्य के प्लान हमेशा गुप्त रखने चाहिए. जो लोग अपनी गुप्त बातें दुनिया को बता देते हैं, उन्हें बुढ़ापे में अक्सर अपने ही करीबियों से अपमान सहना पड़ता है और लोग उनका फायदा उठाते हैं.
धर्म और पुण्य के काम करते रहें इंसान
इस दुनिया में खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही जाता है, लेकिन उसके द्वारा किए गए कर्म हमेशा साथ रहते हैं. जवानी में किए गए मदद के काम और पुण्य समाज में आपका मान-सम्मान हमेशा बनाए रखते हैं. मानसिक शांति पाने के लिए भगवान की भक्ति और सेवा के कामों से जुड़ना बहुत जरूरी है ताकि बुढ़ापे में मन शांत और खुश रहे.
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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
