Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी मानव स्वभाव (Human Behavior), लोभ (Greed), अधैर्य (Impatience) और गलत निर्णयों के परिणामों (Consequences of Wrong Decisions) को गहराई से समझने में मदद करती हैं.
चाणक्य नीति का एक महत्वपूर्ण संदेश यह है कि जो चीज़ निश्चित रूप से हाथ लग चुकी हो, उसे छोड़कर अनिश्चित के पीछे भागना बुद्धिमानी नहीं है. अक्सर ऐसा होता है इंसान जल्दबाज़ी या लालच में आकर हाथ आया अवसर भी खो देता है.
Chanakya Niti Shlok with Meaning in Hindi: चाणक्य नीति का श्लोक
यो ध्रुवं परित्यज्याध्रुवं परिसेवते।
ध्रुवं तस्य नश्यति चाध्रुवं नष्टमेव तत्॥
श्लोक का अर्थ है कि – जो व्यक्ति निश्चित और प्राप्त वस्तु को छोड़कर अनिश्चित वस्तु के पीछे भागता है, वह अपनी निश्चित सफलता भी खो देता है और अनिश्चित भी उसे प्राप्त नहीं होती. अर्थात लालच में लिया गया गलत निर्णय दोनों ओर से नुकसान कराता है.
मिला है उसकी कदर नहीं, तो सब छिन जाता है – चाणक्य नीति से मिलने वाली महत्वपूर्ण सीख
- सबसे पहले निश्चित को प्राथमिकता दें – जो आपके पास है, उसकी कद्र करें.
- अधिक पाने की चाह में मिला हुआ भी हाथ से निकल सकता है इसलिए लालच से बचें.
- जल्दबाज़ी नुकसान की जड़ होती है और धैर्य सबसे बड़ा गुण है.
- बिना सोचे-समझे किया गया फैसला भविष्य बिगाड़ सकता है.इसलिए सोच समझ कर निर्णय लें.
- हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती. सही अवसर की पहचान करें.
- अपनी मेहनत और कर्मों पर भरोसा रखें क्यूंकी केवल भाग्य नहीं, सही कर्म ही सफलता दिलाते हैं.
- असंतोष विनाश का कारण है. संतोष रखने वाला व्यक्ति ही स्थिर रहता है.
जो व्यक्ति हाथ आई चीज़ को संभालकर रखता है और अनिश्चित के पीछे अंधाधुंध नहीं भागता, वही आगे चलकर जीवन में सफल होता है.
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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.
