तनाव से टूट रहे हैं आप? भालू की ये दिनचर्या सिखाएगी स्ट्रेस मैनेजमेंट का आसान तरीका

Bear Lifestyle: भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव हर किसी की समस्या है. जानिए कैसे भालू अपनी दिनचर्या के जरिए स्ट्रेस मैनेज करता है और इंसान इससे क्या सीख सकता है.

Bear Lifestyle: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) हर किसी की समस्या बन चुका है. काम का दबाव, आर्थिक चिंता और भविष्य की अनिश्चितता इंसान को मानसिक रूप से थका देती है. ऐसे में हमें जंगल में रहने वाले कुछ ऐसे जानवर से स्ट्रैस मैनेज करने का तरीका जरूर सीखना चाहिए, इनमें से सबसे प्रमुख नाम है भालू. उनकी दिनचार्या को हम नोटिस करें हम उससे तनाव से निपटने का आसान तरीका सीख सकते हैं. क्योंकि उनकी कुछ आदतें और जीवनशैली से हमें स्ट्रेस मैनेजमेंट का बेहतरीन पाठ पढ़ाती है. आइये जानते हैं वह कौन कौन सी चीज है.

आराम और मेहनत का बेहतरीन संतुलन बनाता है भालू

भालू की सबसे बड़ी खासियत ये है कि वह आराम और मेहनत के बीच संतुलन बनाता है. जब भोजन की जरूरत होती है, तो वह पूरी मेहनत करता है. लेकिन जरूरत पूरी होते ही वह बिना किसी सोचे आराम करता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इंसान अक्सर जरूरत से ज्यादा काम करता है तो आराम को अपनी बर्बादी मानता है. लेकिन पर्याप्त आराम न लेना तनाव की बड़ी वजह बनती है.

भालू की नींद से क्या सीख सकते हैं

भालू लंबी और गहरी नींद लेने के लिए जाना जाता है. खासकर सर्दियों में हाइबरनेशन के दौरान वह शरीर और दिमाग दोनों को पूरा आराम देता है. डॉक्टर्स की मानें तो अच्छी नींद न लेने से तनाव, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन बढ़ता है. ऐसे में भालू की तरह नींद को प्राथमिकता देना तनाव कम करने में मददगार हो सकता है.

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भोजन को लेकर तनाव नहीं

भालू भोजन को लेकर घबराहट या जल्दबाजी नहीं करता है. वह मौसम और उपलब्धता के अनुसार खाता है और शरीर में ऊर्जा का भंडारण कर लेता है. इसके उलट इंसान अक्सर अनियमित खानपान और जंक फूड के कारण मानसिक और शारीरिक तनाव में रहता है. संतुलित और समय पर भोजन, भालू की दिनचर्या से जरूर सीखना चाहिए.

अकेले रहना भी जरूरी

भालू ज्यादातर समय अकेले रहना पसंद करता है. वह बेवजह भीड़ या शोर से दूर रहता है. साइकलॉजी के अनुसार, इंसान के लिए भी कुछ समय खुद के साथ बिताना जरूरी है. यह आत्मचिंतन और मानसिक शांति का बेहतर जरिया बन सकता है.

भालू के जैसा प्रकृति से जुड़ाव जरूरी

भालू का पूरा जीवन प्रकृति के साथ तालमेल पर टिका है. यही कारण है कि वह बदलते मौसम और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल लेता है. इंसान को उससे प्रकृति के करीब रहने, हरियाली और खुले वातावरण में समय बीताना सीखना चाहिए, क्योंकि यह तनाव को काफी हद तक कम कर सकता है.

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लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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