अस्थमा के मरीज को Covid-19 से ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं, पढ़ें क्या है ये नया शोध

coronavirus and asthma, symptoms, treatments, respiratory disease, Covid-19 risk new research: कोरोना काल (Corona) में अस्थमा (Asthma) मरीजों को विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है. लेकिन, नये शोध (covid new research) में जो खुलासा हुआ है वह उन्हें राहत देने वाला है. दरअसल, रटगर्स के शोधकर्ताओं की मानें तो अस्थमा कोविड-19 (COVID-19) की गंभीरता को नहीं बढ़ाता है. आपको बता दें कि यह शोध हाल ही में जर्नल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित हुआ था.

Coronavirus and Asthma : कोरोना काल (Corona) में अस्थमा (Asthma) मरीजों को विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है. लेकिन, नये शोध (covid new research) में जो खुलासा हुआ है वह उन्हें राहत देने वाला है. दरअसल, रटगर्स के शोधकर्ताओं की मानें तो अस्थमा कोविड-19 (COVID-19) की गंभीरता को नहीं बढ़ाता है. आपको बता दें कि यह शोध हाल ही में जर्नल ऑफ एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी में प्रकाशित हुआ था.

अंग्रेजी वेबसाइट हेल्थ शॉट में छपी खबर के मुताबिक रेनॉल्ड ए पैनेटियरी, एक पलमोनेरी क्रिटिकल केयर फिजिशियन और रटगर्स इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड साइंस के निदेशक के अनुसार “बुढ़ापे, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप रोगी, पुराने फेफड़े की बीमारी, मधुमेह और मोटापे से ग्रसित मरीजों में कोविड-19 के संक्रमण का ज्यादा खतरा होता है.

आम तौर पर देखा गया है कि अस्थमा पीड़ित मरीज पहले से ही स्वच्छता और सामाजिक दूरी का सही से पालन करते है. वे अपने स्वास्थ्य के प्रति औरों के मुताबिक ज्यादा सजग और सतर्क रहते हैं. यही नहीं मौसमी फ्लू के दौरान एलर्जी से बचने या कोल्ड, कफ से बचने के लिए खुद को तैयार रखते हैं. दरअसल, किसी भी श्वसन संबंधी बिमारी से उनमें दम फूलने की शिकायतें आने लगती है. यही कारण है कि अपने आप को ज्यादा स्वच्छ और वायरस से बचने का हर संभव प्रयास करते हैं.

दरअसल, कोरोना काल में भी इन्हीं नियमों को पालन करने पर ज्यादा जोड़ दिया जा रहा है. ऐसे में यह भी एक कारण है कि अस्थमा से ग्रसित मरीजों में कोविड-19 के फैलने का खतरा कम होता है. लोग इस महामारी के दौरान विशेष तौर पर अपनी अस्थमा की दवा भी लेने से नहीं चुक रहे हैं.

कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स जो आमतौर पर अस्थमा मरीजों को श्वसन संबंधी समस्याओं से बचाने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं. यह शरीर में संक्रमण को स्थापित करने की और वायरस की क्षमता को भी कम करने में भी लाभदायक है. हालांकि, अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि ये स्टेरॉयड शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में गिरावट भी ला सकती है. ये स्टेरॉयड श्वसन नली को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं.

हालांकि, भविष्य में यह शोध का विषय होगा की अस्थमा मरीजों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा स्टेरॉयड कोविड-19 के खतरे को बढ़ाने में सक्षम है या नहीं.

कोविड-19 और अस्थमा मरीजों के उम्र का कनेक्शन

शोध में यह भी पाया गया है कि कोरोना का खतरा युवाओं की तुलना में अस्थमा के बुजूर्ग मरीजों को ज्यादा हो सकता है. अस्थमा से पीड़ित बच्चे और युवा मुख्य रूप से एलर्जी से पीड़ित होते हैं. दूसरी ओर, बड़े-बुजूर्ग के वायु नली में इस बीमारी से सूजन हो सकता है. वे इसिनोफिलिक अस्थमा के शिकार हो सकते हैं जो आम अस्थमा से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. इस तरह के मामलों में, वायुमार्ग, साइनस, नाक मार्ग और निचले श्वसन तंत्र में सूजन हो सकती है, जो संभावित रूप से कोविड-19 जोखिम को बढ़ा सकता है.

अस्थमा मरीज जिन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह या हृदय रोग भी है. उनमें गैर-अस्थमा रोगियों की तुलना में कोविड-19 का ज्यादा खतरा हो सकता है.

Posted By: Sumit Kumar Verma

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