Maharani Season 4 Review: हुमा कुरैशी की ‘महारानी 4’ ने राजनीति के मैदान में मचाया तहलका, फैंस के बीच बवाल मचा रहा सीरीज

Maharani Season 4 Review: सोनी लिव पर रिलीज हुई ‘महारानी 4’ में हुमा कुरैशी एक बार फिर रानी भारती के दमदार किरदार में नजर आई हैं. इस सीजन में सत्ता, राजनीति और संघर्ष की कहानी और भी गहराई से दिखाई गई है. सुभाष कपूर के निर्देशन में बनी यह सीरीज रोमांच, ड्रामा और पावरफुल डायलॉग्स से भरपूर है.

Maharani Season 4 Review: ओटीटी की पॉपुलर वेब सीरीज ‘महारानी 4’ आखिरकार सोनी लिव पर आज रिलीज हो चुकी है और एक बार फिर हुमा कुरैशी ने अपने दमदार अभिनय से ओटीटी पर वापसी की है. रानी भारती के किरदार में हुमा ने जो पहचान बनाई है, वह दर्शकों को हर एपिसोड तक बांधे रखती है. इस बार की कहानी पिछले सीजन से आगे बढ़ती है और राजनीति की चालों, सत्ता की जंग और निजी संघर्षों के बीच और भी ज्यादा रोमांचक मोड़ लेकर आती है.

सीरीज की टीम

पहले सीजन से ही ‘महारानी’ सीरीज ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है. सुभाष कपूर के क्रिएटिव विजन और हुमा कुरैशी के शानदार अभिनय ने इस शो को एक ब्रांड बना दिया है. चौथे सीजन में भी हुमा के साथ विपिन शर्मा, शार्दुल भारद्वाज, श्वेता बसु प्रसाद, दर्शील सफारी, कनी कश्रुति, विनीत कुमार, और अमित सियाल जैसे कलाकारों ने अपने अभिनय से कहानी को मजबूत बनाया है. इस बार कहानी को सुभाष कपूर, नंदन सिंह, और उमाशंकर सिंह ने लिखा है और हर एपिसोड में उनकी कलम की ताकत साफ झलकती है.

कहानी में आया नया मोड़

सीजन 4 की शुरुआत 2012 के राजनीतिक माहौल से होती है. रानी भारती अब दो बार बिहार की मुख्यमंत्री बन चुकी हैं और अब उनकी नजर राष्ट्रीय राजनीति पर है. दूसरी ओर प्रधानमंत्री सुधाकर श्रीनिवास जोशी टूटते गठबंधन को बचाने में जुटे हैं. सत्ता की यह जंग अब और दिलचस्प हो जाती है क्योंकि रानी और जोशी दोनों अपनी-अपनी एंबीशंस के लिए हर हद तक जाने को तैयार हैं. कहानी तब नया मोड़ लेती है जब रानी को एक पुराने हत्याकांड में फंसाया जाता है और सीबीआई जांच शुरू होती है. 

फैंस के बीच सवाल

अब फैन के बीच यह सवाल उठता है कि क्या रानी इस मुश्किल दौर से निकल पाएंगी? क्या वह देश की प्रधानमंत्री बनेंगी या राजनीति की चालों में फंस जाएंगी? हुमा कुरैशी ने इस बार भी अपने किरदार में गहराई और जुनून दिखाया है. रानी भारती के तेवर, उनकी राजनीति और उनके डायलॉग्स सब कुछ पहले से ज्यादा असरदार हैं. हालांकि, कुछ एपिसोड थोड़े धीमे लगते हैं और नए किरदारों की कहानी पर थोड़ा और ध्यान दिया जा सकता था. फिर भी, यह सीरीज राजनीति, सत्ता और इंसान की भावनाओं के बीच की जंग को शानदार तरीके से पेश करती है.

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By Shreya Sharma

श्रेया शर्मा पिछले 1साल से प्रभात खबर डिजिटल में एंटरटेनमेंट बीट पर कार्यरत हैं. टीवी, ओटीटी, फिल्मों, भोजपुरी सिनेमा और सेलिब्रिटी से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं. ट्रेंडिंग विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य है.

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