swanand kirkire :गीतकार, संगीतकार, सिंगर और एक्टर स्वानंद किरकिरे इन दिनों अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही वेब सीरीज ‘बैंड वाले’ में नजर आ रहे हैं. इस शो से उनका नाम गीतकार, संगीतकार, सिंगर और एक्टर के साथ-साथ क्रिएटर के तौर पर भी जुड़ा है. अपनी नयी जिम्मेदारी और करियर से जुड़ी कई दिलचस्प बातें उन्होंने उर्मिला कोरी साथ साझा कीं.
वेब सीरीज ‘बैंड वाले’का कॉन्सेप्ट कैसे आया. क्या पहले से तय था कि वेब सीरीज ही बनानी है?
मैं और अंकुर तिवारी, हम दोनों ही म्यूजिक की दुनिया से जुड़े लोग हैं. हमने सोचा कि कुछ लिखते हैं और म्यूजिक के इर्द-गिर्द ही कहानी बुनने का फैसला किया. सोशल मीडिया के इस दौर में म्यूजिक के जरिये अपनी पहचान बनाने की जर्नी को यह सीरीज सामने लाती है. साथ ही पुराने और नये संगीत के बीच चल रही जंग को भी यह सीरीज बखूबी दिखाती है.दरअसल, हम इस पर फिल्म ही बनाने वाले थे, लेकिन अमेजन वालों ने कहा कि कहानी में क्षमता है. इस पर सीरीज बना लो. फिर हमने इसे सीरीज में डेवलप किया.
सीरीज के लेखन, एक्टिंग, सिंगिंग, म्यूजिक सभी से आप जुड़े हैं. ऐसे में निर्देशन से खुद को क्यों दूर किया?
मैंने सारे डिपार्टमेंट खुद नहीं संभाले हैं, बल्कि कई लोगों की मदद ली है. एक्टिंग, लिखना और म्यूजिक कंपोज करना, ये तीनों काम साथ-साथ संभव हैं, लेकिन इन सबके साथ निर्देशन करना मुश्किल हो जाता है.सत्तर-अस्सी दिन तक शूटिंग चलती है. हां, अगर आप ही सब कुछ करने लगते हैं, तो सीरीज में एक अलग रंग जरूर आ जाता है. मरियम की जो कविताएं हैं, उन्हें मैंने कौसर मुनीर से लिखवाया था.
किस जिम्मेदारी को निभाना सबसे मुश्किल काम था?
एक्टिंग करना सबसे मुश्किल था. ‘रोबो’ का किरदार बेहद मासूम और निहायत ही बेवकूफ-सा है और उसे निभाना आसान नहीं था. मैं इंदौर से आता हूं. छोटे शहर में ऐसे कई लोगों से मिला हूं, जो अपनी ही दुनिया में रहते हैं. उनके लिए संजय दत्त उनका भाई होता है, तो जैकी श्रॉफ उनका दोस्त. ऐसे लोग बेहद मासूम होते हैं.
इस सीरीज में संगीत के पुराने विधा और मौजूदा दौर में टेक्नोलॉजी के साथ जंग को दिखाया गया है?
हमेशा नये-पुराने की जंग चलती रहती है. जब मैंने शुरू किया था, तो इलेक्ट्रॉनिक साउंड नया आया था. अभी तो एआइ से जंग है, लेकिन जीतता वही है, जिसके संगीत में आत्मा हो. जो दर्शकों के दिल को छू सके.
आप खुद को कितना टेक्निकली अपडेट रखते हैं. इस सीरीज के थीम में बगावत भी है, आप कितने विद्रोही रहे हैं ?
रखना ही पड़ता है, वरना आप खो जायेंगे. अगर मैं इस वक्त काम कर पा रहा हूं, तो मैं अपडेटेड हूं. मैं एआइ का भी इस्तेमाल करता हूं. दुनिया के साथ रहना जरूरी है. जहां तक बगावत की बात है, मैं विद्रोही रहा हूं तभी ढर्रे को तोड़ते रहा हूं. मैंने किसी एक खांचे में खुद को फिट नहीं किया. गीतकार के तौर पर दुकान अच्छी चल रही थी, पर एक्टिंग किया. अब शो बना रहा हूं.
आजकल सिनेमा के गीतों में जिंगोइज्म थोपा जाता है ऐसी चर्चा है,इस पर आपका क्या कहना है ?
हां, थोपा जा रहा है, क्योंकि देश का मूड वही है. राजनीति से लेकर पूरा सिस्टम में वही है. लोग वही देख रहे हैं, तो वही बनाना पड़ेगा. अपने बारे में यही कहूंगा कि हम वो करते हैं, जो हमें करना है. मुझे ये करने की अभी जरूरत नहीं पड़ी.
आनेवाले प्रोजेक्ट्स कौन से हैं?
आनेवाले प्रोजेक्ट्स की बात करूं, तो एक्टर के तौर पर पंचायत 4 और सूरज बड़जात्या की अगली फिल्म में दिखूंगा.
म्यूजिक इंडस्ट्री में अरिजीत के प्लेबैक छोड़ने पर बहस छिड़ गयी है कि सिनेमा का कमर्शियल पहलू क्रिएटिविटी के लिए नुकसानदेह है?
क्रिएटिविटी नहीं, आजादी खत्म हो जाती है. फिल्म के लिए गाना बनाते हुए आपको सभी की सुननी पड़ती है. मैं खुद अभी पांच इंडिपेंडेंट सिंगल रिलीज कर चुका हूं.
