अरे यार... रवि किशन के मीम्स देखे? इस बंदे ने तो जैसे सोशल मीडिया के पूरे एल्गोरिदम को ही हैक कर रखा है. जहां देखो, वहां रवि किशन. “Jaldi The Late”, “Home From Work” और न जाने कितने मीम्स... अब तो देखकर लगता है कि भाई साहब घर बैठे खूब पैसे कमा रहे होंगे. और इतना वायरल हो रहे हैं तो फिल्मों की लाइन भी लग ही गई होगी!
क्या आपके मन में भी ऐसे ही सवाल आते हैं? दरअसल, हम सभी को लगता है कि सोशल मीडिया पर कोई स्टार वायरल हो गया, उसके मीम्स छा गए, तो इसका सीधा फायदा उसकी कमाई, काम और ब्रांड वैल्यू को मिलता होगा. लेकिन क्या सच में इंडस्ट्री ऐसे ही काम करती है?
क्या मीम्स का ट्रेंड किसी अभिनेता की ब्रांड वैल्यू बढ़ाता है? क्या वायरल होने से फिल्मों के ऑफर बढ़ते हैं? क्या ब्रांड्स और इवेंट्स की नजर ऐसे स्टार्स पर जाती है? आइए, रवि किशन के वायरल मीम्स के बहाने समझते हैं कि मीम कल्चर किसी स्टार के लिए सिर्फ मजाक और मनोरंजन है या फिर इसके पीछे कमाई और ब्रांड वैल्यू का भी पूरा खेल है.
मीम सिर्फ हंसी-मजाक नहीं, स्टार की पहुंच बढ़ाने का जरिया आज सोशल मीडिया के दौर में किसी कलाकार का वायरल होना बड़ी बात नहीं है. कोई डायलॉग, वीडियो, तस्वीर या फिल्म का कोई पुराना सीन अचानक मीम बनकर लाखों लोगों तक पहुंच सकता है. कई बार जिस कलाकार को दर्शकों की एक खास श्रेणी ही पहचानती थी, वह मीम के जरिए नए और बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच जाता है.
यही वजह है कि मीम कल्चर अब सिर्फ मनोरंजन नहीं रह गया है.यह किसी कलाकार की दृश्यता यानी लोगों के बीच उसकी मौजूदगी बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है. रवि किशन के मामले को भी इसी नजरिए से देखा जा सकता है. उनके पुराने अंदाज और संवाद सोशल मीडिया यूजर्स को लगातार नया कंटेंट दे रहे हैं. इसका सीधा फायदा यह है कि बड़ी संख्या में लोग उनका नाम देख रहे हैं, उनके वीडियो शेयर कर रहे हैं और उनके काम को लेकर चर्चा कर रहे हैं.
मीम वायरल होने के बाद क्या सीधे मिलने लगते हैं बड़े ऑफर? सोशल मीडिया पर किसी कलाकार के वायरल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या इससे उसे सीधे विज्ञापन और फिल्मों के बड़े ऑफर मिलने लगते हैं? सेलिब्रिटी मैनेजर अहमद खान के मुताबिक, वायरल होने और बड़े ब्रांड ऑफर के बीच सीधा संबंध मान लेना सही नहीं होगा. हालांकि इसका असर इवेंट और सोशल मीडिया से जुड़े कामों पर जरूर दिखाई दे सकता है.अहमद खान कहते हैं,“ब्रांड या विज्ञापन तो नहीं आते, लेकिन हां, इवेंट्स और फंक्शंस को लेकर क्वेरी बढ़ जाती है. कुछ सोशल मीडिया कोलैब भी होते हैं. तो व्यूज बढ़ने का फायदा किसी न किसी रूप में मिलता जरूर है.”
यानी किसी कलाकार के वायरल होने का फायदा हमेशा करोड़ों की ब्रांड डील के तौर पर सामने आए, यह जरूरी नहीं है. कई बार इवेंट में बुलावा, सोशल मीडिया कैंपेन, प्रमोशनल एक्टिविटी या किसी ब्रांड के लिए कलाकार पर विचार किया जाना भी इसी बढ़ी हुई लोकप्रियता का हिस्सा होता है.
‘जितना दिखेंगे, उतना बिकेंगे’वाला फॉर्मूला आज भी काम करता है
वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया विशेषज्ञ अजय ब्रह्मात्मज मानते हैं कि मनोरंजन उद्योग में कलाकार की विजिबिलिटी हमेशा महत्वपूर्ण रही है.सोशल मीडिया ने इस ट्रेंड को और तेज कर दिया है. अजय ब्रह्मात्मज के अनुसार, “इंडस्ट्री में एक नियम है- जितना दिखेंगे, उतना बिकेंगे. उसी तर्ज पर लोकप्रियता बढ़ती है, कलाकार चर्चा में रहता है और काम के ऑफर ज्यादा आते हैं. लेकिन फिल्म या प्रोजेक्ट का चयन उसकी अभिनय क्षमता के आधार पर ही होता है.” इसका मतलब साफ है कि सोशल मीडिया पर वायरल होना किसी कलाकार को निर्माताओं और दर्शकों की नजर में जरूर ला सकता है, लेकिन सिर्फ मीम वायरल होने से किसी फिल्म में काम मिलना तय नहीं हो जाता. कलाकार का अभिनय, उसकी छवि, दर्शकों के बीच लोकप्रियता और प्रोजेक्ट की जरूरत जैसे कई दूसरे पहलू भी महत्वपूर्ण होते हैं.
Alia Bhatt से Rajinikanth तक, मीम्स ने कई सितारों को दिलाई नई पहचान
रवि किशन अकेले ऐसे कलाकार नहीं हैं, जिनके चेहरे, संवाद या अंदाज को सोशल मीडिया ने मीम का हिस्सा बनाया है.आलिया भट्ट के कई एक्सप्रेशन और डायलॉग्स लंबे समय से सोशल मीडिया पर मीम का हिस्सा रहे हैं. वहीं रजनीकांत की फिल्मों के कई सीन और उनका खास अंदाज वर्षों से मीम संस्कृति में इस्तेमाल होता रहा है.पंकज त्रिपाठी और अली फजल जैसे कलाकारों के संवाद और फिल्मी दृश्यों को भी सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग संदर्भों में इस्तेमाल किया है. खास बात यह है कि कई बार किसी फिल्म के रिलीज होने के वर्षों बाद उसका कोई सीन मीम बनकर दोबारा वायरल हो जाता है. इसके साथ ही कलाकार भी नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच फिर चर्चा में आ जाता है.
क्या मीम्स से बदल सकती है किसी स्टार की इमेज?
यहां मीम की लोकप्रियता और किसी कलाकार की ब्रांड इमेज के बीच अंतर समझना जरूरी है.किसी अभिनेता का एक खास एक्सप्रेशन हजारों मीम का हिस्सा बन सकता है. लोग उस पर हंस सकते हैं और उसे खूब शेयर कर सकते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दर्शक उस कलाकार को सिर्फ उसी मजाकिया छवि में देखने लगेंगे.किसी कलाकार की वास्तविक पहचान लंबे समय में उसके काम से बनती है. उसकी फिल्मों का प्रदर्शन, अभिनय, दर्शकों से जुड़ाव और लगातार अच्छे प्रोजेक्ट उसकी ब्रांड इमेज तय करते हैं.इसलिए मीम किसी कलाकार की पहुंच और दृश्यता बढ़ा सकता है, लेकिन उसकी पूरी पहचान को बदल दे, यह जरूरी नहीं है.
पीआर टीम भी मीम कल्चर का फायदा उठाती है?
आज सेलिब्रिटी पीआर का तरीका भी काफी बदल चुका है. पहले कलाकारों को अखबारों, टेलीविजन इंटरव्यू, मैगजीन और इवेंट के जरिए चर्चा में रखा जाता था. अब सोशल मीडिया इस पूरी प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा बन चुका है.अजय ब्रह्मात्मज के मुताबिक, कई बार सेलिब्रिटी की टीम ऐसे कंटेंट और पलों को भी आगे बढ़ाती है, जिनसे कलाकार लगातार चर्चा में बना रहे. हालांकि हर वायरल कंटेंट के पीछे पीआर हो, यह मानना भी सही नहीं है.सोशल मीडिया की खासियत यही है कि यहां दर्शकों की भूमिका सबसे बड़ी है. कोई कंटेंट लोगों को पसंद आया तो वह अपने आप हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच सकता है. वहीं किसी योजनाबद्ध प्रचार अभियान को दर्शक पसंद न करें तो वह ज्यादा आगे नहीं बढ़ता.
दर्शक तय करते हैं कि कौन सा मीम टिकेगा
मीम कल्चर में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका दर्शकों की होती है. पीआर टीम किसी तस्वीर या वीडियो को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है, लेकिन उसे लंबे समय तक वायरल बनाए रखना पूरी तरह उसके हाथ में नहीं होता.लोग जिस कंटेंट से जुड़ते हैं, उसे आगे शेयर करते हैं. यही वजह है कि कई बार बिना किसी योजना के बनाया गया छोटा सा वीडियो भी लाखों लोगों तक पहुंच जाता है.यानी सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए सिर्फ पैसा या पीआर काफी नहीं है. कंटेंट में ऐसा कुछ होना जरूरी है, जिससे दर्शक खुद जुड़ सकें.
रवि किशन के लिए फायदेमंद है यह वायरल ट्रेंड?
अब सवाल रवि किशन पर लौटता है. क्या उनके मीम्स की यह लोकप्रियता उनके लिए फिल्मों और दूसरे कामों के नए रास्ते खोल सकती है? फिलहाल इसका निश्चित जवाब देना जल्दबाजी होगी. हालांकि इतना जरूर है कि उनकी दृश्यता बढ़ी है. बड़ी संख्या में लोग उनका नाम देख रहे हैं, उनके वीडियो और तस्वीरें शेयर कर रहे हैं और उनके पुराने कामों को नए संदर्भ में देख रहे हैं.इससे नए अवसरों की संभावना जरूर बढ़ सकती है. लेकिन यह कहना कि वायरल मीम्स के बाद उनके पास फिल्मों की लाइन लग जाएगी या उनकी फीस में बड़ा इजाफा होगा, फिलहाल सिर्फ अनुमान होगा. इसके समर्थन में कोई ठोस आंकड़ा सामने नहीं है.
वायरल होना शुरुआत है, मंजिल नहीं
दरअसल, मीम कल्चर किसी कलाकार को अचानक चर्चा में ला सकता है, लेकिन उस चर्चा को लंबे समय की सफलता में बदलना कलाकार के काम पर निर्भर करता है.रवि किशन के मामले में वायरल मीम्स ने उन्हें एक बार फिर सोशल मीडिया की बातचीत का हिस्सा बना दिया है. अब यह लोकप्रियता कितने नए अवसरों में बदलती है, यह आने वाला वक्त बताएगा.मनोरंजन उद्योग में सिर्फ दिखाई देना काफी नहीं है. दिखाई देना जरूरी है, लेकिन उस दृश्यता को काम और लंबे समय की लोकप्रियता में बदलना उससे भी ज्यादा जरूरी है.
रवि किशन के वायरल मीम्स ने फिलहाल इतना जरूर साबित किया है कि सोशल मीडिया किसी कलाकार को कितनी तेजी से नई पीढ़ी के बीच चर्चा में ला सकता है. ब्रांड वैल्यू, काम और फीस पर इसका कितना असर पड़ेगा, इसका जवाब अभी भविष्य के पास है. लेकिन फिलहाल रवि किशन एक बार फिर सुर्खियों में हैं और मनोरंजन की दुनिया में सुर्खियों में बने रहना अपने आप में एक बड़ी ताकत है.
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