Dacoit Ek Prem Katha Movie Review :इस प्रेम कथा में इमोशन के साथ लॉजिक भी है गायब

फिल्म डकैत एक प्रेम कथा देखने की प्लानिंग है तो पढ़ लें यह रिव्यु

फिल्म – डकैत एक प्रेम कथा
निर्देशक -शेनिल देव
कलाकार -अदिवि शेष ,मृणाल ठाकुर,अनुराग कश्यप,अतुल कुलकर्णी ,सुनील और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग – दो

dacoit ek prem katha movie review:सिनेमा में एक्शन और रोमांस यह दो जॉनर पॉपुलर रहे हैं. समय समय पर मेकर्स इन दोनों जॉनर को एक कर कुछ रेगुलर टाइप से अलग फिल्म देने की कोशिश करते आये हैं. डकैत एक प्रेम कथा के मेकर्स ने भी अपनी एक्शन रोमांटिक फिल्म को कुछ अलग करार दिया था. फिल्म सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है लेकिन कमजोर कहानी और स्क्रीनप्ले ने इन दावों की कलई खोल दी है.

ये है फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी हरि (अदिवि शेष )की है , जो जेल में पिछले दस साल से बलात्कार और हत्या के लिए सजा काट रहा है.वह यह सजा अपने प्यार जूलिएट (मृणाल ठाकुर )की झूठी गवाही की वजह से काट रहा है। एक वक़्त जिस जूलिएट के लिए वह जान भी दे सकता है अब उसकी तबाही उसका मकसद है.वह जेल से भागकर इस मकसद को पूरा करना चाहता है. जेल से हाल ही में रिहा हुआ साथी (अतुल कुलकर्णी )इसमें हरी की मदद करता है। जूलिएट से वह बदला लेने के लिए जेल से भागता तो है, लेकिन जब हरि शादीशुदा और एक बेटी की माँ बन चुकी जूलिएट से मिलता है तो जल्द ही हरि की नफरत, परवाह में बदल जाती है. अतीत के कुछ राज भी सामने आ जाते हैं.जिससे यह नफरत की कहानी प्यार में कुर्बान हो जाने की दास्तान बन जाती है.

स्क्रीनप्ले कमजोर और लॉजिक की भी रह गयी कमी


फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले कमजोर है. यह फिल्म कोविड के दौर में सेट है.अस्पताल किस तरह से करप्शन का गढ़ बन गए थे। यह फिल्म ये दिखाती है लेकिन वह आपको झकझोरता नहीं है.कहानी से इमोशन सिर्फ इस पहलू पर ही नहीं बल्कि प्यार में भी गायब है।फिल्म लव स्टोरी है लेकिन शुरुआत में अदिवि और मृणाल के किरदार के बीच वह बॉन्डिंग दिखाई नहीं दी है.जो इसे इंटेंस लव स्टोरी की सबसे बड़ी ज़रूरत थी. फिल्म में कास्ट सिस्टम के दर्द को सरसरी तौर पर दिखाया है. इमोशन के साथ साथ लॉजिक भी कहानी और स्क्रीनप्ले से नदारद है.फिल्म का मुख्य प्लाट डकैती है लेकिन डकैती के सीन्स एकदम सुविधाजनक तरीके से फिल्माए गए हैं.कभी भी करुणा अस्पताल के अलग अलग ब्रांच में डकैती को अंजाम दिया जा रहा है.दो लोग बिना किसी प्लानिंग के पूरे करुणा हॉस्पिटल की सिक्योरिटी और पुलिस महकमे को चकमा दे रहे हैं.फिल्म के दूसरे पहलुओं की बात करें तो लव स्टोरी फिल्मों में संगीत एक अहम किरदार होता है लेकिन इस फिल्म में वह भी कमजोर रह गया है. पवन सिंह का गीत टच बड्डी कुछ खास जोड़ नहीं पाया है.हिंदी संवाद पर थोड़ा और काम करने की जरुरत थी.

कुछ पहलू जो अच्छे हैं

फिल्म का कांसेप्ट अच्छा है. फिल्म के अच्छे पहलुओं में आखिर के बीस मिनट शामिल है.जो आपको बांधे रखता है. कुछ ट्विस्ट एंड टर्न सामने आते हैं. जो अच्छे बन पड़े हैं. फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है. इसके साथ ही तकनीकी पहलु भी अच्छे बन पड़े हैं.

कमजोर स्क्रीनप्ले ने कलाकारों के परफॉरमेंस को भी सीमित

अभिनय की बात करें तो अदिवि सेष अपनी भूमिका के साथ अच्छी कोशिश की है लेकिन कई जगह वह ओवर द टॉप हो गए है। मृणाल ठाकुर अपनी भूमिका के साथ न्याय करती हैं. फिल्म के सेकेंड हाफ में उन्हें परफॉर्म करने का मौक़ा मिला है। अनुराग कश्यप ठीक रहे हैं. कमजोर स्क्रीनप्ले ने उनके किरदार को ज्यादा निखरने नहीं दिया है.प्रकाश राज ने रूटीन वाला परफॉरमेंस दिया है. इस तरह के किरदार में वह पहले भी नजर आ चुके हैं। बाकी के किरदारों को करने के लिए कुछ खास नहीं था.

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लेखक के बारे में

By Urmila Kori

I am an entertainment lifestyle journalist working for Prabhat Khabar for the last 14 years. Covering from live events to film press shows to taking interviews of celebrities and many more has been my forte. I am also doing a lot of feature-based stories on the industry on the basis of expert opinions from the insiders of the industry.

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