फिल्मकार मेघना गुलजार ने अपने पिता और मशहूर गीतकार गुलजार की लोकप्रियता को लेकर बात की है. गुलजार के गीत और कविताएं आज भी लोगों की जुबान पर हैं. खास बात ये है कि सिर्फ उनकी पुरानी पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आज के युवा भी उनके लिखे शब्दों से जुड़ते हैं. सोशल मीडिया पर उनकी शायरी और गाने रील्स में भी खूब दिखाई देते हैं. मेघना ने बताया कि आखिर इतने साल बाद भी गुलजार के शब्द लोगों के दिल तक कैसे पहुंच रहे हैं.
आज के दौर में भी गुलजार के शब्द क्यों पसंद आते हैं?
मेघना गुलजार ने पीटीआई-भाषा से बातचीत में कहा कि उनके पिता ने खुद को समय के साथ लगातार बदला है. उन्होंने जिस दौर में काम किया, उस समय की भाषा को अपने गीतों और कविताओं में जगह दी.
यही वजह है कि उनके लिखे शब्द सिर्फ एक दौर तक सीमित नहीं रहे. आज की पीढ़ी भी उन भावनाओं को आसानी से समझ पाती है और उनसे जुड़ जाती है.
इंस्टाग्राम रील्स में भी दिखती है गुलजार की शायरी
गुलजार की कविताओं और शायरी को सोशल मीडिया ने एक नई जगह दी है. उनकी लिखी लाइनें आजकल इंस्टाग्राम रील्स में भी सुनने और पढ़ने को मिल जाती हैं.
मेघना ने कहा कि यह देखकर उन्हें बहुत अच्छा लगता है कि एक ऐसी पीढ़ी, जो शायद कविता की बहुत बड़ी फैन नहीं है, वह भी गुलजार के शब्दों को अपनी रील्स में इस्तेमाल कर रही है.
ये भी पढ़ें: 205 करोड़ कमाए, फिर भी हाथ से निकला ऑस्कर... Hanuman Ansh की प्रोड्यूसर ने बताई ऐसी वजह, सुनकर पकड़ लेंगे सिर
सात दशक से लोगों के दिलों में हैं गुलजार
गुलजार का करियर सात दशक से भी ज्यादा लंबा रहा है. उन्होंने गीतकार के साथ-साथ पटकथा लेखक और निर्देशक के तौर पर भी काम किया है.
उनके कई गाने आज भी लोगों को याद हैं. इनमें ‘आनंद’ का ‘मैंने तेरे लिए’, ‘मासूम’ का ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी’, ‘इजाजत’ का ‘मेरा कुछ सामान’, ‘आंधी’ का ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई’, ‘दिल से..’ का ‘छैंया छैंया’ और ‘गुरु’ का ‘ऐ हैरते’ जैसे गाने शामिल हैं.
इन गानों की खास बात यही है कि इन्हें सुनने के लिए किसी खास दौर से जुड़ा होना जरूरी नहीं है. भावनाएं आज भी उतनी ही आसानी से समझ आती हैं.
मेघना बोलीं- ये जुड़ाव बहुत खास है
मेघना ने कहा कि गुलजार की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने खुद को एक ही तरह की भाषा तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने समय के साथ अपनी भाषा और लिखने के अंदाज को भी बदला.
उनके मुताबिक, यही चीज उनकी कविताओं और गीतों को अलग बनाती है. मेघना ने कहा कि उनके पिता बहुत भाग्यशाली हैं कि उन्हें अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों से ऐसा जुड़ाव मिला.
लोग गुलजार के शब्दों में खुद को देखते हैं
मेघना ने यह भी कहा कि गुलजार के शब्द इतने अपने से लगते हैं कि लोगों को लगता है कि वे उन्हें जानते हैं. उनके लिखे शब्दों में ऐसी भावनाएं होती हैं, जिनसे लोग अपनी जिंदगी को जोड़ लेते हैं.
शायद यही वजह है कि इतने साल बाद भी गुलजार की कविताएं, शायरी और गाने लोगों के बीच अपनी जगह बनाए हुए हैं. वक्त बदल गया, सोशल मीडिया का दौर आ गया, लेकिन उनके शब्दों की पकड़ आज भी वैसी ही बनी हुई है.
