सिंगर ने बेटे की मौत के बाद गाया ऐसा गाना, जो हो गया अमर, आज भी रो देते हैं लोग

Jagjit Singh: गजल सम्राट जगजीत सिंह को गुजरे दस साल हो गए, लेकिन उनकी रुहानी आवाज़ आज भी जिंदा है. ‘चिट्ठी ना कोई संदेश’ उनके निजी दर्द और अमर संगीत की सबसे भावुक मिसाल है. आइए इस गाने की पूरी कहानी बताता हूं…

By Aniket Kumar | January 10, 2026 6:00 PM

Jagjit Singh: आज ‘गजल सम्राट’ जगजीत सिंह को हमसे जुदा हुए दस साल हो चुके हैं, लेकिन उनकी आवाज का असर आज भी वैसा ही है. ऐसा लगता है जैसे उनकी गजलें वक्त के साथ और गहरी होती चली गई हों. वे सिर्फ गायक नहीं थे, बल्कि एहसासों को आवाज देने वाले कलाकार थे. उनकी कई गजलें ऐसी हैं, जिन्हें सिर्फ सुना नहीं जाता, बल्कि दिल से महसूस किया जाता है. इन्हीं में से एक है बेहद दर्दभरा गीत “चिट्ठी ना कोई संदेश”, जो आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है.

सड़क हादसे में हो गयी थी बेटे की मौत

बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गाने के पीछे जगजीत सिंह का अपना दर्द भी छुपा था. जगजीत सिंह और उनकी पत्नी चित्रा का एक बेटा था, जिसकी एक सड़क हादसे में मौत हो गई. इस हादसे ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया. लंबे समय तक वे संगीत से दूर रहे, क्योंकि गाने की ताकत ही उनसे छिन गई थी. लेकिन जब उन्होंने वापसी की, तो उनका अंदाज बदला हुआ था, और भी ज्यादा गहराई और दर्द से भरा हुआ.

ये रहा वो गजल

आनंद बख्शी के लिखे बोल हुए अमर

फिल्म ‘दुश्मन’ में गाया गया गीत “चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन-सा देश, जहां तुम चले गए” मानो उनके दिल का हाल बयां करता हो. आनंद बख्शी के लिखे ये बोल आज अमर हो चुके हैं और जगजीत सिंह की आवाज ने इन्हें हमेशा के लिए यादगार बना दिया.

महफिलों से निकालकर हर घर तक पहुंचाया

8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में जन्मे जगजीत सिंह ने गजलों को आम लोगों तक पहुंचाया. उन्होंने गजल को महफिलों से निकालकर हर घर तक पहुंचा दिया. “होश वालों को खबर क्या” जैसी गजलें आज भी उतनी ही ताजा लगती हैं. 1961 में ऑल इंडिया रेडियो से करियर शुरू करने वाले जगजीत सिंह को उनके योगदान के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. 10 अक्टूबर 2011 को मुंबई में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी आवाज आज भी जिंदा है.

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