Governor: “जिस विषय से नफरत थी, उसी का बॉस बनना पड़ा”, पूर्व RBI गवर्नर का रोल निभाने पर बोले मनोज बाजपेयी

Governor: एक्टर मनोज बाजपेयी ने बताया कि पूर्व आरबीआई गवर्नर एस. वेंकिटरमणन का रोल करना उनके लिए कितना मुश्किल था. जिस इकोनॉमिक्स से वो भागते थे, फिल्म ‘गवर्नर’ के लिए उन्हें वही पढ़ना पड़ा.

Governor: मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘गवर्नर’ को लेकर सुर्खियों में हैं. इस फिल्म में वह RBI के पूर्व गवर्नर एस. वेंकिटरमणन का किरदार निभा रहे हैं. 12 जून 2026 को रिलीज होने वाली इस फिल्म के प्रमोशन के दौरान मनोज ने बताया कि एक असली और इतने बड़े अधिकारी का रोल निभाना उनके लिए बिल्कुल अलग अनुभव था. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बचपन से इकोनॉमिक्स से डर लगता था, इसलिए इस किरदार को समझने और निभाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी.

पूर्व गवर्नर का रोल निभाने में क्या थी सबसे बड़ी चुनौती?

मनोज बाजपेयी ने मनी कंट्रोल को दिए इंटरव्यू में बताया कि असल जिंदगी में वह इकोनॉमिक्स (अर्थशास्त्र) में बहुत कमजोर थे और अपने कॉलेज के दिनों में इस विषय से सख्त नफरत करते थे. लेकिन इस फिल्म में उन्हें देश के सबसे बड़े इकोनॉमिक्स एक्सपर्ट का रोल करना था.

मनोज ने कहा, “चुनौती सिर्फ भारी-भरकम शब्दों को बोलने की नहीं थी. मुझे एक ऐसे सीधे-साधे और शांत रहने वाले अफसर (टेक्नोक्रेट) के दिमाग को समझना था, जो अचानक देश के सबसे बड़े आर्थिक संकट के बीच में फंस जाता है और पूरी दुनिया उसकी तरफ देखने लगती है.”

किरदार को असली रूप देने के लिए मनोज ने क्या-क्या किया?

मनोज बाजपेयी ने बताया कि ‘गवर्नर’ की कहानी पूर्व RBI गवर्नर एस. वेंकिटरमणन के जीवन के उन अहम छह महीनों पर आधारित है, जब साल 1991 में भारत गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था. इस किरदार को पर्दे पर पूरी ईमानदारी से दिखाने के लिए मनोज ने काफी तैयारी की.

उन्होंने जीडीपी, फिस्कल डेफिसिट और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई ऐसे विषयों को पढ़ा, जिनसे वह पहले हमेशा दूर रहते थे. इसके अलावा उन्होंने 1991 के दौर के पुराने अखबार, लेख और रिपोर्ट्स भी पढ़ीं ताकि उस समय के माहौल और परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ सकें.

मनोज का कहना है कि वह सिर्फ इकोनॉमिक्स की बातें नहीं दिखाना चाहते थे, बल्कि उस इंसान की कहानी लोगों तक पहुंचाना चाहते थे, जिसने अपनी समझदारी और फैसलों से देश को मुश्किल हालात से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी.

कहानी ने क्यों जीता मनोज बाजपेयी का दिल?

मनोज ने बताया कि उन्हें इस फिल्म की कहानी 4 साल पहले मिली थी. उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी बहुत सीधी और दिलचस्प है. यह एक ऐसे इंसान की कहानी है, जिसे अचानक एक बहुत बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन वह अपनी अलग सोच और समझदारी से हालात बदल देता है.

मनोज के मुताबिक, इस किरदार ने उन्हें कुछ नया करने का मौका दिया, जो उन्होंने अपने पूरे करियर में पहले कभी नहीं किया था.

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By Sheetal choubey

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मूल रूप से बिहार के बक्सर की रहने वाली शीतल की शुरुआती पढ़ाई कानपुर (उत्तर प्रदेश) में हुई. इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शब्द सांची से की, जहां उन्होंने एजुकेशन और एंटरटेनमेंट दोनों बीट्स पर काम किया. इसी दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग के साथ वॉइस ओवर और Adobe Premiere Pro पर बेसिक वीडियो एडिटिंग का अनुभव भी हासिल किया.

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