दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार को आज भी उनके करीबी लोग प्यार से उनके असली नाम यूसुफ खान के नाम से याद करते हैं. हालांकि उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में इस नाम का इस्तेमाल नहीं किया. उन्होंने साल 1944 में अमिया चक्रवर्ती की फिल्म 'ज्वार भाटा' से दिलीप कुमार नाम के साथ बॉलीवुड में डेब्यू किया और यही नाम उनकी पहचान बन गया.
दिलीप कुमार ने क्यों बदला था अपना असली नाम?
दिलीप कुमार ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्होंने यूसुफ खान की जगह दिलीप कुमार नाम क्यों अपनाया. एक्टर ने कहा था, "मैंने दिलीप कुमार नाम इसलिए रखा, क्योंकि मुझे डर था कि कहीं मुझे मार न पड़े."
फिल्मों के खिलाफ थे दिलीप कुमार के पिता
उन्होंने बताया कि उनके स्वर्गीय पिता फिल्मों के सख्त खिलाफ थे और वह नहीं चाहते थे कि उनका बेटा फिल्म इंडस्ट्री में काम करे. दिलीप कुमार ने याद किया कि उनके पिता के करीबी दोस्त लाला बशेशर नाथ थे, जिनके बेटे पृथ्वीराज कपूर भी फिल्मों में एक्टिंग करते थे. दिलीप कुमार के मुताबिक, उनके पिता अक्सर बशेशर नाथ से कहते थे, "तुमने अपने बेटे के साथ क्या किया? देखो, तुम्हारा बेटा कितना अच्छा और स्वस्थ है, लेकिन वह फिल्मों में काम कर रहा है."
दिलीप कुमार के लिए इन 3 नामों पर हुआ था विचार
दिलीप कुमार ने बताया कि जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा तो उन्हें अपने पिता की प्रतिक्रिया का डर था. उन्होंने कहा कि उनके पिता (लाला गुलाम सरवर अली खान) काफी सख्त और गुस्सैल स्वभाव के थे, इसलिए उन्हें चिंता थी कि अगर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में आने की बात पता चली तो वह नाराज हो जाएंगे. उन्होंने बताया कि उस समय उनके लिए कुछ नामों पर विचार किया गया था, जैसे यूसुफ खान, दिलीप कुमार और बासुदेव. दिलीप कुमार ने मजाकिया अंदाज में कहा, "मैंने खुद कहा था कि बस यूसुफ खान नाम मत रखना, बाकी कुछ भी चलेगा." उन्होंने आगे बताया कि करीब दो-तीन महीने बाद उन्होंने एक विज्ञापन में अपना नाम दिलीप कुमार देखा और तब उन्हें पता चला कि अब यही उनकी नई पहचान बन चुकी है.
दिलीप कुमार नाम किसने दिया था?
दिलीप कुमार ने अपनी साल 2014 में आई ऑटोबायोग्राफी 'द सब्सटेंस एंड द शैडो' में खुलासा किया था कि उनका स्क्रीन नेम 'दिलीप कुमार' रखने का आइडिया दिग्गज अभिनेत्री और बॉम्बे टॉकीज की मालकिन देविका रानी का था. बॉम्बे टॉकीज ने ही दिलीप कुमार की पहली फिल्म 'ज्वार भाटा' (1944) को प्रोड्यूस किया था. देविका रानी को लगा कि एक रोमांटिक हीरो के तौर पर उनकी स्क्रीन इमेज के लिए दिलीप कुमार नाम ज्यादा बेहतर और दर्शकों से जुड़ने वाला रहेगा.
देविका रानी ने स्क्रीन नेम को लेकर क्या कहा था दिलीप कुमार से
दिलीप कुमार ने अपनी किताब में लिखा था कि देविका रानी ने उनसे कहा था, "यूसुफ, मैं तुम्हारी बतौर अभिनेता लॉन्चिंग के बारे में सोच रही थी. मुझे लगा कि अगर तुम एक स्क्रीन नेम अपना लो तो यह अच्छा रहेगा. ऐसा नाम, जिससे दर्शक तुम्हें आसानी से पहचान सकें और जो तुम्हारी रोमांटिक छवि से भी मेल खाए." देविका का यह फैसला ऐतिहासिक साबित हुआ, क्योंकि दिलीप कुमार आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे महान कलाकारों में शामिल हुए. पद्म विभूषण से सम्मानित दिलीप कुमार का 98 साल की उम्र में साल 2022 में निधन हो गया था.
