राजेश खन्ना का आइकॉनिक बंगला 'आशीर्वाद' करीब 10 साल पहले ही टूट चुका था. इस जगह पर अब चार मंजिला घर बनाया गया है, लेकिन सोशल मीडिया और कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस प्रॉपर्टी को बार-बार "भूतिया", "मनहूस" या "श्रापित" बताया जाता रहा. इस मामले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है.
Bombay High Court Bars Media From Calling Rajesh Khanna Aashirwad Haunted Or Cursed: 'आशीर्वाद' को 'भूतिया' या 'मनहूस' बताने पर हाईकोर्ट की रोक
24 जुलाई को जस्टिस अरिफ एस. डॉक्टर ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि बिना किसी आधार के किसी प्रॉपर्टी को ऐसे टैग देना पहली नजर में मानहानिकारक है. कोर्ट ने माना कि इस तरह की बातें मालिक के सम्मान और गरिमा के साथ शांतिपूर्ण जीवन जीने के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन करती हैं. इसलिए मीडिया संस्थानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को फिलहाल इस प्रॉपर्टी के लिए "श्रापित", "भूतिया" या "मनहूस" जैसे शब्द इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है.
आशीर्वाद के मौजूदा मालिक ने खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा
यह सुनवाई तब शुरू हुई, जब आशीर्वाद के मौजूदा मालिक और बिजनेसमैन शशि शेट्टी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. वजह थी कि उन्हें कई मीडिया रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया पोस्ट्स और वीडियोज मिले, जिनमें उनकी प्रॉपर्टी को भूतिया बताया जा रहा था.
वकील बीरेंद्र सराफ ने आशीर्वाद को लेकर क्या कहा
शशि शेट्टी की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील बीरेंद्र सराफ ने कोर्ट को बताया कि पुराने आशीर्वाद बंगले को काफी पहले ढहाकर उसी जगह नया मकान तैयार किया गया था. हालांकि, प्रॉपर्टी का नाम नहीं बदला गया और नई बिल्डिंग भी आज 'आशीर्वाद' के नाम से ही जानी जाती है. याचिकाकर्ता ने यह भी कोर्ट के सामने रखा कि एक मीडिया हाउस ने हाल ही में "19 Real Haunted Houses in India That Will Give You A Cold Sweat" शीर्षक से एक आर्टिकल प्रकाशित किया था, जिसमें आशीर्वाद का नाम भी कथित तौर पर शामिल किया गया था.
कोर्ट ने कही ये बात
कोर्ट ने माना कि अंतरिम राहत मांगने का फैसला प्रॉपर्टी मालिक की तरफ से पूरी तरह उचित था. अपने आदेश में अदालत ने कहा कि पहली नजर में उपलब्ध सामग्री मानहानिकारक लगती है. कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी बातें किसी व्यक्ति के सम्मान के साथ शांतिपूर्ण जीवन जीने के अधिकार को प्रभावित कर सकती हैं. सुनवाई के दौरान जज ने यह भी नोट किया कि किसी भी प्रतिवादी ने कोर्ट में उपस्थित होकर अपनी रिपोर्ट या कंटेंट का बचाव नहीं किया
कब होगी अगली सुनवाई
अदालत के मुताबिक, पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है कि इस तरह के लेख और पोस्ट सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए प्रकाशित किए गए, जबकि इसका नुकसान सीधे तौर पर वादी को हुआ, जबकि उसकी इसमें कोई गलती नहीं थी. कोर्ट की ओर से दी गई अंतरिम राहत अब अगली सुनवाई, 21 अगस्त 2026, तक लागू रहेगी.
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