Batwara 1947 Flop: सनी देओल के मुस्लिम रोल ने फ्लॉप करवाई फिल्म? इन 2 शख्स ने खोला राज, बोले- पैसा लगाने के लिए नहीं थे तैयार

Batwara 1947 Flop: सनी देओल की बंटवारा 1947 बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. फिल्म का कलेक्शन 8 दिनों में ही लाखों में सिमट चुका है. इसी बीच सोशल मीडिया पर चर्चा थी कि गदर 2 एक्टर के मुस्लिम रोल की वजह से यह सफल नहीं हो पाई. अब राजकुमार संतोषी और फिल्म क्रिटिक्स ने पूरी बात बताई है.

Batwara 1947 Flop: सनी देओल और प्रीति जिंटा स्टारर बंटवारा 1947 बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई. फिल्म ने 8 दिनों में महज 34.35 करोड़ कमाए. 14 अगस्त को रिलीज हुई ऐतिहासिक ड्रामा को क्रिटिक्स और दर्शकों से मिली जुली प्रतिक्रिया मिली. कई यूजर्स का सोशल मीडिया पर कहना है कि सनी पाजी ने मुस्लिम रोल निभाया था, इसलिए मूवी फ्लॉप हो गई.

Rajkumar On Batwara 1947 Box Office Failure: बंटवारा 1947 के बॉक्स ऑफिस असफलता पर क्या बोले राजकुमार संतोषी

राजकुमार संतोषी ने बंटवारा 1947 के बॉक्स ऑफिस असफलता पर बात की. उन्होंने गलाटा प्लस को दिए इंटरव्यू में बताया कि जब मुंबई के कई इन्वेस्टर्स को पता चला कि वह और सनी देओल साथ में फिल्म बना रहे हैं, तो उन्होंने दोनों को एक मास एक्शन या रिवेंज वाली फिल्म करने की सलाह दी. लोग बंटवारा जैसी कहानी में पैसा लगाने के लिए तैयार नहीं थे, जिसमें सनी देओल एक मुस्लिम किरदार सिकंदर मिर्जा का रोल निभा रहे हैं.

डायरेक्टर ने यह भी कहा कि कुछ रिव्यूज देखें थे, जिसमें लोगों ने सनी देओल के किरदार को पाकिस्तानी बताया. हालांकि यह गलत है, क्योंकि फिल्म में सनी का किरदार एक भारतीय मुस्लिम है, जो हालात बिगड़ने के बाद अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान जाने को मजबूर होता है.

बंटवारा 1947 का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

Sunny Deol Muslim Character Reason For Batwara 1947 Flop: सनी देओल के मुस्लिम कैरेक्टर की वजह से क्या फ्लॉप हुई बंटवारा 1947

क्या बंटवारा 1947 के फ्लॉप होने की वजह सच में सनी देओल का मुस्लिम किरदार निभाना और पाकिस्तान जाना है? इसपर फिल्म क्रिटिक्स जोगिंदर टुटेजा ने भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि सनी देओल का मुस्लिम किरदार निभाना या कहानी का पाकिस्तान से जुड़ा होना फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर कमजोर प्रदर्शन की वजह नहीं है.

Why Batwara 1947 Flop: क्यों फ्लॉप हुई बंटवारा 1947

उन्होंने आगे कहा, आज का दर्शक काफी समझदार और ओपन माइंडेड है. सिर्फ इसलिए कोई फिल्म रिजेक्ट नहीं की जाती कि उसका मुख्य किरदार किसी खास धर्म या देश से जुड़ा हुआ है. लोग थिएटर में फिल्म देखने और एंटरटेन होने जाते हैं, लेकिन बंटवारा 1947 यहीं पर ऑडियंस को निराश करती है. जिन लोगों ने फिल्म देखी, उनमें से भी कई को इसकी कहानी खास कनेक्ट नहीं कर पाई.

Where Batwara 1947 Fails To Connect with Audience: कहां दर्शकों से कनेक्ट नहीं कर पाई बंटवारा 1947

शुरुआत अच्छी रहती है और ट्रेन वाले सीक्वेंस में जब बंटवारे की भयावहता दिखाई जाती है, तब फिल्म काफी असरदार लगती है, लेकिन जैसे ही सनी देओल और उनका परिवार पाकिस्तान पहुंचता है, कहानी की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है. कई कलाकारों की परफॉर्मेंस भी उम्मीद के मुताबिक इम्पैक्ट छोड़ने में नाकाम रहती है. इसी वजह से दर्शक कहानी से और ज्यादा डिस्कनेक्ट होने लगता है. ओवरऑल Batwara 1947 एक मिस्ड अपॉर्च्युनिटी लगती है, लेकिन इसके कमर्शियल फेलियर की वजह सनी देओल का मुस्लिम किरदार निभाना या पाकिस्तान की कहानी होना बताना सही नहीं लगता.

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By आशीष लता

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आशीष लता ने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग, रिसर्च और जर्नलिज्म के 5Ws + 1H सिद्धांतों पर उनकी मजबूत पकड़ है. यही वजह है कि उनका कंटेंट भरोसेमंद, संतुलित और पाठकों के लिए उपयोगी माना जाता है.

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