AR Rahman Birthday Special: 200 रुपये की कमाई से ऑस्कर तक, ए आर रहमान के जन्मदिन पर जानिए उनकी सक्सेस जर्नी

AR Rahman Birthday Special: AR Rahman के जन्मदिन पर जानिए कैसे कभी 100–200 रुपये रोज कमाने वाले ए.आर. रहमान बने ऑस्कर विजेता और ग्लोबल म्यूजिक आइकन. दिलीप कुमार से रहमान बनने तक का सफर संघर्ष, साधना और संगीत की अद्भुत कहानी है.

By Pushpanjali | January 6, 2026 7:06 AM

AR Rahman Birthday Special: भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले ए.आर. रहमान आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. 6 जनवरी 1967 को जन्मे रहमान न सिर्फ एक महान संगीतकार हैं, बल्कि वे उस जुनून और संघर्ष की मिसाल भी हैं, जिसने उन्हें दुनिया के सबसे सम्मानित म्यूजिक आइकन में शामिल किया. उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ खास और प्रेरक पहलू.

दिलीप कुमार से ए.आर. रहमान बनने तक

ए.आर. रहमान का जन्म एक हिंदू परिवार में ए.एस. दिलीप कुमार के नाम से हुआ था. उनकी बहन की गंभीर बीमारी के दौरान एक पीर की दुआओं से उन्हें राहत मिली, जिसके बाद पूरा परिवार इस्लाम धर्म में परिवर्तित हुआ. इसके साथ ही दिलीप कुमार का नाम बदलकर अल्लाह रखा रहमान हो गया.

पढ़ाई छूटी, संगीत बना सहारा

महज 15 साल की उम्र में कम अटेंडेंस के कारण रहमान को स्कूल छोड़ना पड़ा. परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने इलैयाराजा की म्यूजिक ट्रूप में कीबोर्ड प्लेयर के तौर पर काम करना शुरू किया. यहीं से उनके प्रोफेशनल करियर की नींव पड़ी. बाद में उन्हें ट्रिनिटी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक पढ़ने की स्कॉलरशिप भी मिली.

200 रुपये की कमाई से शुरुआत

रहमान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि 1984 में वे मशहूर संगीतकार रमेश नायडू के साथ काम करते थे और उस समय उनकी रोज की कमाई सिर्फ 100 से 200 रुपये हुआ करती थी. यही दौर उनके संघर्ष की असली पहचान था.

‘रोजा’ नहीं, ‘योधा’ थी पहली फिल्म

अक्सर लोग मानते हैं कि रहमान की पहली फिल्म ‘रोजा’ थी, लेकिन असल में उनका डेब्यू मलयालम फिल्म ‘योधा’ (1992) से हुआ था. ‘रोजा’ ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई.

ऑस्कर तक पहुंचा सफर

फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ का गीत ‘जय हो’ पहले ‘युवराज’ के लिए बना था. बाद में इसी गाने ने रहमान को दो ऑस्कर दिलाए. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म ‘ताल’ के दौरान सुभाष घई ने उनके ऑस्कर जीतने की भविष्यवाणी की थी, जिसे रहमान ने तब मजाक में लिया था.

आज भी सादगी और समर्पण

रहमान रात के सन्नाटे में संगीत रचना पसंद करते हैं और स्टूडियो में पूरी तरह खुद को काम में डुबो देते हैं. टेक्नोलॉजी के प्रति उनका लगाव आज भी उनके म्यूजिक में झलकता है.

ए.आर. रहमान का सफर यह साबित करता है कि मेहनत, आस्था और लगन से कोई भी सपना हकीकत बन सकता है.