भारतीय सिनेमा के दिग्गज संगीतकार खय्याम की तबीयत पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रही है. फेफड़ों में संक्रमण के चलते उन्हें मुंबई के सूरज अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है. मशहूर संगीतकार इस वक्त आईसीयू में हैं. खबरों की मानें तो 92 वर्षीय संगीतकार पिछले रविवार से ही आईसीयू में भर्ती हैं. डॉक्टरों की एक टीम उनके इलाज में लगी हुई है.
संगीत नाटक अकादमी और पद्म भूषण से सम्मानित मोहम्मद जहूर ‘खय्याम’ हाशमी ने 17 साल की उम्र में पंजाब के लुधियाना से संगीत की दुनिया में अपना सफर शुरू किया था. ‘कभी कभी’ और ‘उमराव जान’ के कामयाब संगीत के साथ खय्याम का करियर परवान चढ़ा और हिंदी सिनेमा में उन्होंने एक खास पहचान बनाई.
साल 1953 में फिल्म फुटपाथ से उन्होंने अपने बॉलीवुड करियर की शुरूआत की थी. इसके बाद साल 1961 में रिलीज हुई फिल्म ‘शोला और शबनम’ में संगीत देकर खय्याम साहब को पहचान मिलनी शुरू हो गई.
खय्याम साहब ने नूरी, कभी-कभी, त्रिशूल, आखिरी खत, उमराव जान, रजिया सुल्तान और थोड़ी सी वेवफाई जैसी कई फिल्मों की धुनें दी. साल 2007 में उन्हें संगीत नाटक अकेडमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. साल 2011 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया.
उन्हें फिल्म कभी कभी (1977) और उमराव जान (1982) के लिए सर्वश्रेष्ठ म्यूजिक डायेक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला. उन्हें उमराव जान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला. कम ही लोग इस बात से वाकिफ होंगे कि साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘यात्रा’ में खय्याम साहब का संगीत था. फिल्म में रेखा और नाना पाटेकर मुख्य भूमिका में थे.
अपने 90वें जन्मदिन के मौके पर खय्याम साहब ने अपनी संपूर्ण संपत्ति दान करने की घोषणा की है, जो तकरीबन 12 करोड़ की है. ख़य्याम और उनकी गायिका पत्नी जगजीत कौर ने फिल्म जगत के जरूरतमंद और उभरते संगीतकारों के लिए एक ट्रस्ट की घोषणा की है. इस ट्रस्ट का नाम ‘खय्याम प्रदीप जगजीत चैरिटेबल ट्रस्ट’ है और इसके मुख्य ट्रस्टी गजल गायक तलत अजीज और उनकी पत्नी बीना हैं.
