'हनुमान जी ने दिखाया रास्ता..' 1 रील से स्टार बने दृष्टिहीन सिंगर सुनील लोधी, फैन ने बाइक देकर क्यों बुक किया पूरा थिएटर?

सोशल मीडिया की ताकत ने एक बार फिर मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव के गायक की जिंदगी बदल दी दृष्टिहीन सिंगर सुनील लोधी की आवाज का ऐसा जादू चला कि बॉलीवुड से कॉल आने लगे, फैन ने पल्सर बाइक गिफ्ट की और पूरे गांव के लिए टॉकीज का शो बुक कर लिया गया.

हुनर किसी पहचान का मोहताज नहीं होता और जब उस पर भक्ति का रंग चढ़ जाए, तो किस्मत बदलते देर नहीं लगती. मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले सुनील लोधी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. हाल ही में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म 'हनुमान अंश' में उनका गाया भजन "मैंने तेरे ही भरोसे नैया सागर में डार दई" लोगों के दिलों को छू रहा है. जन्म से दृष्टिहीन होने के बाद भी अपनी आवाज के दम पर सुनील ने पूरे देश में तहलका मचा दिया है.

सोशल मीडिया रील से मुंबई का सफर

सागर जिले के जैसीनगर ब्लॉक के आगरा गांव के रहने वाले सुनील लोधी की आवाज पहले केवल स्थानीय आयोजनों तक सीमित थी. वे अपने पारंपरिक वाद्य यंत्र 'तमुरा' के साथ बुंदेली भजन गाया करते थे. लेकिन एक दिन उनका भजन "मोरे संकट के कटैया हनुमान जी" सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. इस एक रील ने उनका रास्ता सीधे मुंबई के म्यूजिक स्टूडियो तक पहुंचा दिया. 'हनुमान अंश' की बंपर सफलता के बाद अब उन्हें बॉलीवुड की नई फिल्मों से प्लेबैक सिंगिंग के ऑफर मिल रहे हैं. इसके साथ ही गणेशोत्सव के दौरान उनके कई लाइव स्टेज शोज बुक हो चुके हैं.

फैन ने दी पल्सर बाइक, पूरे गांव के लिए बुक हुआ थिएटर

सुनील की गायकी के दीवाने उनके प्रशंसक भी अलग-अलग अंदाज में प्यार लुटा रहे हैं. एक प्रशंसक ने तो सुनील को ब्रांड न्यू बजाज पल्सर बाइक तोहफे में दे दी. वहीं, एक अन्य मुरीद ने मकरोनिया के प्लेटिनम प्लाजा सिनेमाघर का पूरा शो ही बुक कर दिया, ताकि सुनील अपने माता-पिता, दादी, भाई-बहन और पूरे गांव वालों के साथ अपनी फिल्म देख सकें. हालांकि सुनील आंखों से देख नहीं सकते, लेकिन थिएटर में गूंजती तालियों और अपनों की खुशी ने उनका दिल जीत लिया.

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जब 'भौंरे' ने दिखाया था रास्ता हनुमान जी पर अटूट भरोसा

नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म 'हनुमान अंश' में काम करने वाले सुनील अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय भगवान हनुमान को देते हैं. वे अपने जीवन का एक भावुक वाकया याद करते हुए बताते हैं कि एक बार वे गांव से बाहर रास्ता भटक गए थे और आंखों से न देख पाने के कारण निराश होकर ईश्वर से शिकायत कर रहे थे. तभी अचानक एक भौंरा आया और उनके पास भिनभिनाने लगा. सुनील उस भौंरे की आवाज का पीछा करते हुए चलते गए और सही सड़क तक पहुंच गए, जिसके बाद वह भौंरा गायब हो गया. सुनील का मानना है कि यह बजरंगबली का ही चमत्कार था, जिसने आज उनकी पूरी जिंदगी बदल कर रख दी है.

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By Nikita Singh

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