Amzad Khan Death Anniversary: जब एक धोबी ने बना दिया था आईकॉनिक फिल्म ‘शोले’ का गब्बर

Amzad Khan Death Anniversary: आज शोले के गब्बर की पुण्यतिथि है, ऐसे में आज हम जानेंगे कि कैसे उन्हें एक धोबी ने आईकॉनिक फिल्म शोले का गब्बर बना दिया था.

Amzad Khan Death Anniversary: सिनेमा इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार रहे, जिन्होंने अच्छे और बुरे दोनों ही किरदारों को निभाकर अमिट छाप छोड़ी है. इन कलाकारों के डायलॉग से लेकर किरदारों को आज भी दर्शक मुजबानी याद रखती है. इन्हीं में से एक हैं शोले के ‘गब्बर’ यानी अमजद खान. आज अमजद खान 32वीं डेथ एनिवर्सरी है. ऐसे में आज हम के बारे में कई रोचक बातें जानेंगे.

कितने आदमी थे

शोले के आईकॉनिक किरदार गब्बर सिंह को बच्चा-बच्चा जानता है, और इसका डायलॉग ‘कितने आदमी थे’ तो आज भी कहीं चल जाए तो सीटी और तालियां बजनी शुरू हो जाती है. लेकिन क्या आपको पता है कि इस आईकॉनिक किरदार को तैयार करने के लिए अमजद खान को एक धोबी की जरूरत पड़ी थी. नहीं, तो आइए जानते हैं क्या था यह किस्सा.

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अमजद खान की फिल्में

अमजद खान का जन्म 12 नवंबर 1940 को पेशावर में हुआ था. उन्होंने इंडस्ट्री में साल 1951 में फिल्म नाजनीन से बतौर बाल कलाकार कदम रखा था. धीरे धीरे उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और 17 साल की उम्र में 1973 की फिल्म हिंदुस्तान की कसम में बतौर हीरो डेब्यू किया. इसके अलावा वह परवरिश, मुकद्दर का सिकंदर, लावारिस, हीरालाल- पन्नालाल, सीता और गीता जैसी कई फिल्मों में नजर आए. लेकिन उन्हें असल पहचान अपने गब्बर वाले किरदार से ही मिली.

धोबी से प्रभावित हुए थे अमजद खान

शोले के गब्बर के लिए अमजद खान मेकर्स की पहली पसंद नहीं थे बल्कि मेकर्स ने यह रोल डैनी डेन्जोंगपा को ऑफर किया था. हालांकि, वह उस वक्त अपने धर्मात्मा फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे, जिसके बाद सलमान खान के पिता सलीम खान ने अमजद खान का नाम मेकर्स को सुझाया, और ऐसे यह किरदार गब्बर को मिला. लेकिन गब्बर के किरदार में ढलना कोई बच्चों का खेल नहीं था. ऐसे में अमजद खान ने भी हार नहीं मानी. दरअसल, उनके गांव में एक धोबी था, जो ठेठ भाषा में सबसे बात करता था. धोबी के इस अंदाज ने अमजद को काफी प्रभावित किया और वह भी सेट पर इसी लहजे में बात करने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद शूट पर सभी काफी दंग रह गए और ऐसे एक धोबी ने दुनिया को गब्बर जैसा आईकॉनिक किरदार दिया.

51 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

अमजद खान ने 27 जुलाई 1992 को दुनिया को अलविदा कह दिया था. उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी. उस वक्त वह महज 51 वर्ष के थे. भले आज वह इस दुनिया के नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्में उन्हें आज ही भी खुद में जिंदा रखती है.

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By Sheetal choubey

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मूल रूप से बिहार के बक्सर की रहने वाली शीतल की शुरुआती पढ़ाई कानपुर (उत्तर प्रदेश) में हुई. इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शब्द सांची से की, जहां उन्होंने एजुकेशन और एंटरटेनमेंट दोनों बीट्स पर काम किया. इसी दौरान उन्होंने कंटेंट राइटिंग के साथ वॉइस ओवर और Adobe Premiere Pro पर बेसिक वीडियो एडिटिंग का अनुभव भी हासिल किया.

करीब एक साल के अनुभव के बाद साल 2024 में वह प्रभात खबर डिजिटल से जुड़ीं. यहां वह रोजाना बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स, बॉलीवुड, साउथ सिनेमा, भोजपुरी इंडस्ट्री, OTT और टीवी से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं.

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