Aaradhya Bachchan Case: 11 साल की आराध्या बच्चन की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल को जारी किया समन

Aaradhya Bachchan Court Case – 11 साल की आराध्या ने फेक न्यूज से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. आराध्या बच्चन की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल और कुछ यूट्यूब चैनलों को समन जारी किया है.

Aaradhya Bachchan Court Case: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की पोती और अभिषेक बच्चन-ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी आराध्या बच्चन (Aaradhya Bachchan) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. 11 साल की आराध्या ने फेक न्यूज से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. आराध्या बच्चन की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल और कुछ यूट्यूब चैनलों को समन जारी किया है.

गूगल और यूट्यूब चैनलों को समन

दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिषेक बच्चन द्वारा अपनी बेटी के स्वास्थ्य के बारे में कथित रूप से फर्जी खबरें फैलाने के लिए दायर एक मुकदमे में गूगल एलएलसी और यूट्यूब पर चैनल चलानेवाली कई संस्थाओं को समन जारी किया है. कोर्ट ने अंतरिम निर्देश जारी करते हुए कहा कि Google LLC कानून में कर्तव्यबद्ध है कि वह मध्यस्थों से संबंधित संपूर्ण वैधानिक व्यवस्था का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे, जिसमें आईटी नियम 2021 शामिल है.

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दरअसल, यह मामला फेक न्यूज से जुड़ा है. ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन की इकलौती बेटी आराध्या बच्चन की तबीयत को लेकर एक यूट्यूब चैनल ने अफवाहें उड़ाईं, जिसे देख कर बच्चन परिवार खासा नाराज हुआ और उन्होंने अब सख्त कदम उठाने का फैसला लिया. बच्चन परिवार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यूट्यूब चैनल के खिलाफ एक्शन लेने की बात कही है, जिन्होंने आराध्या बच्ची की हेल्थ को लेकर फर्जी खबर चलायी. याचिकाकर्ता बच्चन परिवार ने अपनी याचिका में कहा कि उनकी बेटी माइनर है. उसके खिलाफ ऐसी नेगेटिव खबरें परेशान करनेवाली है. बता दें कि अभी इन खबरों पर ऐश्वर्या और अभिषेक ने ऑफिशियली रिएक्ट नहीं किया है. हालांकि, अभिषेक बच्चन पहले भी 11 साल की बेटी के खिलाफ होनेवाली ट्रोलिंग और निगेटिव खबरों पर रिएक्ट कर चुके हैं.

कोर्ट ने क्या कहा?

आराध्या बच्चन की इस याचिका पर आज सुनवाई हुई. जस्टिस सी हरिशंकर की एकल जज पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने चैनल से कहा कि इस तरह के मामले से निपटने के लिए आपके पास नीति क्यों नहीं है. कोर्ट ने कहा कि यूट्यूब की जीरो टॉलरेंस नीति में गड़बड़ है. कोर्ट ने यूट्यूब चैनल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता से कहा कि आप सिर्फ जानकारी दे रहे हैं और आपको इसकी सच्चाई से कोई मतलब नहीं है. कोर्ट ने कहा, यह मानहानि का मामला नहीं है, यह गलत सूचना प्रसारित करने का मामला है. यूट्यूब एक फायदा लेने वाला प्लैटफॉर्म है और अगर आप इससे फायदा ले रहे हैं तो आप पर सामाजिक जिम्मेदारी भी है.

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By Rajeev kumar

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