प्यार नफरत से बहुत बड़ा होता है बता गया नाटक रोमियो-जूलियट

पटना : प्यार ईश्वर के दिये हुए उपहारों में सबसे सुंदर उपहार है लेकिन समाज के बनाये नियम, जो झूठी शानों- शोहरत पर टिके हैं, इसे आसानी से स्वीकार नहीं करते. यह बता गया मंगलवार को पटना के कालिदास रंगालय में थियेट्रॉन रेक्स की तरफ से मंचित नाटक रोमियो और जूलियट. नाटक की परिकल्पना व […]

पटना : प्यार ईश्वर के दिये हुए उपहारों में सबसे सुंदर उपहार है लेकिन समाज के बनाये नियम, जो झूठी शानों- शोहरत पर टिके हैं, इसे आसानी से स्वीकार नहीं करते. यह बता गया मंगलवार को पटना के कालिदास रंगालय में थियेट्रॉन रेक्स की तरफ से मंचित नाटक रोमियो और जूलियट. नाटक की परिकल्पना व निर्देशन रंजन कुमार ने किया था. नाटक, रोमियो और जुलिएट की प्रेम कहानी दिखा गया. नाटक की कहानी कहती है कि रोमियों के पिता मौंटैग्य और जुलिएट के पिता कैप्यूलैट के बीच खानदानी दुश्मनी चल रही होती है. वे एक-दूसरे को देखना भी नहीं चाहते हैं. लेकिन एक दिन उनके बच्चे रोमियो और जुलिएट एक दूसरे से मिलते हैं और उन्हें प्यार हो जाता है.

दोनों को पता होता है कि उनके परिवार वाले उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे इसलिए वे एक चर्च में जाकर चुपके से शादी कर लेते हैं. शादी करने में जुलिएट की नर्स और चर्च के पादरी का सहयोग मिलता है मगर यह प्यार ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाता है. रोमियो अपने दोस्त मक्यूर्शियो की हत्या के कारण जुलिएट के चचेरे भाई टाइबॉल्ट को मार देता है जिसके कारण उसे देश निकाला की सजा सुनाई जाती है. इधर जूलियट के माता-पिता उसे पेरिस के साथ शादी करने को मजबूर करने लगते हैं. लेकिन जुलिएट को यह रिश्ता मंजूर नहीं था, वह फ्रायर लारेंस के पास जाती है और सारी बातें बताती है.
फ्रायर लारेंस उसे एक दवा देता है और बताता है कि यह चौबीस घंटों तक उसे मरे हुए व्यक्ति के जैसा कर देगा. लारेंस बताता है इसके बाद वह रोमियो को इसकी खबर देकर उसे बुला लेगा और फिर चौबीस घंटे होते ही उसे कब्र से निकालकर उसे कहीं दूर लेकर चला जायेगा लेकिन ऐसा होता नहीं है. रोमियो को सही खबर नहीं मिलती है. चौबीस घंटे बाद जब जुलिएट होश में आती है तो वह रोमियों को अपने बगल में मरा हुआ पाती है. वह सबकुछ समझ जाती है, जुलिएट रोमियो के बिना जी नहीं सकती थी इसलिए वह भी अपने सीने में खंजर से वार कर मर जाती है.
नाटक में ये थे कलाकार
रंजन कुमार, आकांक्षा प्रिया, रवि आनंद, मृगांक कुमार, मृत्युंजय कुमार, रेणु सिन्हा, प्रिया शाह, वंदना वर्मा, मोहन कुमार झा रवि कौशिक आदि.

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