Lok Sabha Election 2024 : असदुद्दीन ओवैसी ने कहा-पीएम मोदी ने हमेशा मुसलमानों के प्रति नफरत फैलाई

एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी पर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को लेकर पीएम मोदी ने झूठी सफाई दी है.

Lok Sabha Election 2024 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट्टर विरोधी एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने हमला बोला है. एक्स पर ट्‌वीट करके ओवैसी ने कहा कि पीएम मोदी ने हमेशा मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाई है और अब वे ये कह रहे हैं कि मैं हिंदू-मुस्लिम नहीं करता. दरअसल वे झूठी सफाई दे रहे हैं, उनके मन में मुसलमानों के लिए सिर्फ नफरत है. इस चुनाव में बीजेपी ने मुसलमानों के प्रति सिर्फ नफरत फैलाई है. ओवैसी ने कहा कि इस तरह के भाषण के बावजूद जो वोटर बीजेपी को वोट देता है वो भी कठघरे में है.

मैंने कभी हिंदू मुसलमान नहीं किया :पीएम मोदी

असदुद्दीन ओवैसी का यह बयान तब सामने आया है, जब पीएम मोदी ने CNN को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि मैंने लोकसभा चुनाव 2024 को जीतने के लिए कभी भी हिंदू और मुसलमान नहीं किया है और ना ही दोनों धर्म के लोगों के बीच दीवार खड़ी है. अगर मैं हिंदू-मुसलमान करूंगा तो मैं सार्वजनिक जीवन के लिए अयोग्य हो जाऊंगा. यह मेरा संकल्प भी है कि मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा कि 2002 के गोधरा कांड के बाद से उनके विरोधी लगातार यह कोशिश कर रहे हैं कि उनकी छवि मुसलमानों के बीच खराब की जाए.

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कांग्रेस ने भी किया हमला

लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर यह आरोप लगाया था कि वह पिछड़ों और दलितों का आरक्षण उनसे छीनकर मुसलमानों को देना चाहती है. साथ ही उन्होंने प्रचार अभियान के दौरान कांग्रेस के विरासत टैक्स पर भी सवाल उठाया था. पीएम मोदी के आरोपों के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग से यह शिकायत की थी कि प्रधानमंत्री हिंदू-मुसलमान के बीच विभाजन कर रहे हैं. बीजेपी के कट्टर विरोधी ओवैसी ने भी पीएम मोदी को उनके प्रचार अभियान के लिए घेरा था और यह कहा था कि क्या एक प्रधानमंत्री को यह शोभा देता है.

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Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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