Success Story SDM Sudha Singh: बिहार का LBSNAA कहे जाने वाले BIPARD में इन दिनों नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) बांटने की प्रक्रिया चल रही है. BPSC 70वीं परीक्षा क्रैक करने वाले कैंडिडेट्स को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नियुक्ति पत्र दिया है. BIPARD में अपॉइंटमेंट लेटर लेने के बाद सुधा सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर की है. आइए उनकी BPSC क्रैक करने की जर्नी पर एक नजर डालते हैं.
सबसे पहले समझें क्या है BIPARD?
बिहार के गया में बना बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट यानी BIPARD को बिहार का LBSNAA भी कहा जाता है. यहां प्रशासनिक अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से निभा सकें. इन दिनों BIPARD एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि 70वीं BPSC परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को यहीं नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं.
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Success Story SDM Sudha Singh: कौन हैं सुधा सिंह?
सुधा सिंह रोहतास जिले के धरहरा गांव की रहने वाली हैं. उनका परिवार बेहद साधारण रहा है, लेकिन पढ़ाई को लेकर घर में हमेशा माहौल अच्छा रहा. सुधा की शुरुआती पढ़ाई रांची के सरकारी स्कूल से हुई. उनके पिता जगनारायण सिंह रांची में नौकरी करते थे, इसलिए उनकी पढ़ाई का शुरुआती हिस्सा वहीं बीता. आगे की उच्च शिक्षा उन्होंने बिहार में रहकर पूरी की.
ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली का रुख
सुधा सिंह ने वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और 2018 में अपनी पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला लिया और UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं. दिल्ली पहुंचने के बाद उनके सामने पढ़ाई के साथ कई तरह की चुनौतियां भी आईं, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी.
उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा के दो प्रयास किए. हालांकि दोनों प्रयासों में उन्हें मनचाही सफलता नहीं मिली, लेकिन इसी दौरान उनका आत्मविश्वास और मजबूत होता गया.
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भाई ने दिखाई सिविल सेवा की राह
सुधा की सफलता की कहानी में उनके बड़े भाई की भूमिका बेहद खास रही. सुधा बताती हैं कि उनके भाई का सपना था कि वह सिविल सेवा में जाएं. उन्होंने हर कदम पर सुधा का हौसला बढ़ाया और मुश्किल समय में भी उनका साथ नहीं छोड़ा.
सुधा के मुताबिक, भाई ने कभी उन्हें यह महसूस नहीं होने दिया कि वह असफल हो गई हैं. यही भरोसा उनके लिए आगे बढ़ने की ताकत बना.
दूसरे प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचीं
BPSC की तैयारी में भी सुधा को सफलता तुरंत नहीं मिली. यह उनका तीसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने आखिरकार कामयाबी हासिल की. इससे पहले दूसरे प्रयास में वह इंटरव्यू राउंड तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका.
यह असफलता उनके लिए निराश होने की वजह जरूर बनी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी तैयारी की कमी समझकर आगे बढ़ने का मौका बनाया. लगातार मेहनत के बाद 70वीं BPSC परीक्षा में उनका चयन हो गया.
चार साल की मेहनत का मिला फल
सुधा सिंह की यह सफलता करीब चार साल के संघर्ष का नतीजा है. दिल्ली में तैयारी के दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. खुद सुधा कहती हैं कि दिल्ली जाने के बाद उनकी जिंदगी ने एक तरह से यू-टर्न लिया. घर का आराम छूटा और कई मुश्किल परिस्थितियों के बीच पढ़ाई करनी पड़ी.
जब 70वीं BPSC का रिजल्ट आया तो उन्हें पहले यकीन ही नहीं हो रहा था कि इस बार उनका चयन हो जाएगा. लेकिन रिजल्ट ने उनकी वर्षों की मेहनत पर मुहर लगा दी.
गांव की पहली लड़की बनीं अधिकारी
सुधा सिंह के लिए यह सिर्फ नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं है. उनके लिए यह अपने गांव की दूसरी लड़कियों के लिए एक मिसाल बनने का मौका भी है. सुधा के मुताबिक, वह अपने गांव की पहली लड़की हैं, जिसने इतनी बड़ी सरकारी पोस्ट हासिल की है.
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