Success Story: हरदा की बेटी की जीत! शादी के प्रेशर के बीच, Shivani बनीं डिप्टी कलेक्टर

MPPSC Success Story: हरदा जिले के छोटे से गांव सिराली की रहने वाली शिवानी की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए मिसाल है, जो हालातों से लड़कर अपने सपनों को जिंदा रखते हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई 12वीं तक गांव के ही स्कूल से हुई. गांव के स्कूल से निकलकर उन्होंने सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) तक का सफर तय किया. आइए, जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी.

MPPSC Success Story: हरदा जिले के छोटे से गांव सिराली की रहने वाली शिवानी की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए मिसाल है, जो हालातों से लड़कर अपने सपनों को जिंदा रखते हैं. शिवानी के सामने शादी, आर्थिक तंगी जैसी कई मुश्किलें आईं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आइए, जानते हैं संघर्ष से लेकर सक्सेस तक उनकी कहानी.

12वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से हुई

शिवानी सिरमाचे (Shivani Sirmache) मध्य प्रदेश के हरदा जिले की रहने वाली हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई 12वीं तक गांव के ही स्कूल से हुई. आगे की पढ़ाई के लिए वह भोपाल गईं, जहां उन्होंने बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने की तैयारी भी शुरू की.

कोविड ने कमर तोड़ दी

लेकिन तभी कोविड-19 ने सब कुछ बदल कर रख दिया. परिवार की आर्थिक हालत बिगड़ गई, समाज का दबाव बढ़ने लगा और लोगों ने शादी की बातें शुरू कर दीं. ऐसे दौर में जहां कई लोग अपने सपनों को छोड़ देते हैं, वहीं शिवानी ने हालात के आगे घुटने टेकने से इनकार कर दिया. उन्होंने न सिर्फ अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि खुद को संभालते हुए रास्ता भी तलाशा.

कई बार असफल होने के बाद भी हारी नहीं

घर की मदद और अपने खर्च निकालने के लिए शिवानी ने स्कूल के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. इससे उन्हें थोड़ा-बहुत सहारा मिला. दिन में बच्चों को पढ़ाना और रात में खुद की तैयारी करना, यही उनकी दिनचर्या बन गई. वह बैंक और अन्य सरकारी परीक्षाओं (Sarkari Exams) की तैयारी में जुट गईं. लेकिन मेहनत के बावजूद उन्हें बार-बार असफलता मिली. कई बार वह अंदर से टूट चुकी थीं, लेकिन हार मानना उनके स्वभाव में कभी रहा ही नहीं.

Success Story: सेल्फ स्टडी के दम पर प्रीलिम्स में पाई सफलता

असफलताओं के बीच जब शिवानी खुद को संभाल ही रही थीं, तभी परिवार की तरफ से भी दबाव बढ़ गया. घर वालों ने साफ कह दिया या तो घर से रहकर पढ़ाई करके पास करो या शादी कर लो. यह शिवानी के लिए सबसे कठिन मोड़ था. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय 2022 में सेल्फ स्टडी के दम पर प्रीलिम्स परीक्षा पास कर ली. इसके बाद वह मेंस की तैयारी के लिए इंदौर गईं.

Madhya Pradesh Daughter Story: 102 डिग्री बुखार में परीक्षा देने जाती थीं

मेंस परीक्षा के दौरान शिवानी की तबीयत बेहद खराब थी. वह 102 डिग्री बुखार से जूझ रही थीं. शरीर साथ नहीं दे रहा था, कमजोरी थी, लेकिन हौसला मजबूत था. छह पेपर उन्होंने तेज बुखार की हालत में दिए. हर सवाल के साथ वह अपने सपनों को बचाने की कोशिश कर रही थीं. दर्द और कमजोरी के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी. वर्ष 2024 में शिवानी ने 11वीं रैंक के साथ सफलता हासिल की.

लाखों बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

आज शिवानी की कहानी यह सिखाती है कि सपनों की राह आसान नहीं होती, लेकिन अगर इरादे मजबूत हों तो हालात भी रास्ता छोड़ देते हैं. गांव की सीमाओं, आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव से निकलकर शिवानी ने साबित कर दिया कि हिम्मत और मेहनत से किस्मत भी बदली जा सकती है.

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