लॉ का करियर छोड़ IAS बनीं वैशाली सिंह, 6 बार गोल्ड मेडल

IAS Vaishali Singh: 2019 बैच की अधिकारी वैशाली सिंह अपनी पर्सनालिटी और ग्राउंड लेवल काम के लिए जानी जाती हैं. वे Women Empowerment को बढ़ावा देती हैं. पर्सनल लेवल पर उन्हें स्पोर्ट्स में बहुत इंटरेस्ट है.

IAS Vaishali Singh: वकीलों से घिरी हुई थी. खुद भी वकील थी. लेकिन एक दिन अचानक सब छोड़कर यूपीएससी क्रैक करने का जुनून सर चढ़ गया. पहले प्रयास में गलत स्ट्रैटजी के कारण असफलता मिली. लेकिन दूसरे ही प्रयास में किस्मत बदल डाली. कुछ ऐसी ही कहानी है इस यंग महिला IAS की जोकि हरियाणा की रहने वाली हैं. हम बात कर रहे हैं वैशाली सिंह की.

महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा

वैशाली सिंह (Vaishali Singh Current Posting) हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP), गुरुग्राम के प्रशासक के रूप में कार्यरत हैं. वैशाली सिंह उन गिने चुने IAS में से एक हैं, जो ग्राउंड पर दिखती हैं. फिर चाहे वो बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाया जाने वाला प्रोग्राम हो या फिर कैंसर से बचने के लिए महिलाओं और लड़कियों को जागरुक करना हो, वैशाली सिंह हमेशा एक्टिव रहती हैं.

एक कार्यक्रम के दौरान की तस्वीर (PC-X)

स्पोर्ट्स और साइकलिंग में है रूचि

पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्हें फीट रहना पसंद है. साथ ही स्पोर्ट्स और साइकलिंग में इंटरेस्ट है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक साइकलिंग करते हुए फोटो भी अपलोड किया है. साथ ही वे एक डॉग लवर हैं.

वैशाली सिंह (Image Source- X)

गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं

वैशाली सिंह मूल रूप से हरियाणा के फरीदाबाद की रहने वाली हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई फरीदाबाद से हुई. ग्रेजुएशन की पढ़ाई नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से हुई. NLU से वैशाली सिंह ने पांच साल का इंटीग्रेटेड लॉ का कोर्स किया है. पढ़ाई के दौरान उन्होंने 6 बार गोल्ड मेडल जीता.

कहां से मिली UPSC की प्रेरणा?

लॉ करने के बाद वैशाली को फील हुआ कि वो जो करना चाह रही हैं, नहीं कर पा रही हैं. वे जब फील्ड में जाती और लोगों की तकलीफें देखती तो उनका मन होता था कि इसे बदल दें. पर उनके पास इतनी पावर नहीं थी. यही कारण है कि उन्होंने इस फील्ड को छोड़कर सिविल सेवा में जाने का मन बनाया. माता पिता से प्रेरणा लेकर वैशाली सिंह ने UPSC की तैयारी शुरू की.

पहले प्रयास में असफल, दूसरे में पाई सफलता

वैशाली सिंह ने प्रीलिम्स की परीक्षा दी पर उसमें पास नहीं हो पाई. उन्होंने अपनी गलतियों से सीखकर दूसरे प्रयास के लिए कड़ी मेहनत की. अपनी कुछ आदतों में सुधार किया. उन्होंने प्रीलिम्स की तैयारी अच्छे से नहीं की थी और न मॉक टेस्ट दिया था. साल 2018 में अपने दूसरे प्रयास में वैशाली सिंह ने सफलता हासिल कर ली.

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लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.

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